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आरक्षण में सुधार, संवैधानिक सवर्ण आयोग के गठन, यूजीसी के कथित दमनकारी प्रावधानों के वापसी मांग को लेकर सवर्ण समाज का अनिश्चित कालीन धरना आज पांचवें दिन भी जारी...

आरक्षण में सुधार, संवैधानिक सवर्ण आयोग के गठन, यूजीसी के कथित दमनकारी प्रावधानों के वापसी मांग को लेकर सवर्ण समाज का अनिश्चित कालीन धरना आज पांचवें दिन भी जारी...

वाराणसी, न्यूज। आरक्षण में सुधार, संवैधानिक सवर्ण आयोग के गठन और यूजीसी के कथित दमनकारी प्रावधानों को वापस लेने की मांग को लेकर सवर्ण समाज का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में वरुणा नदी के शास्त्री घाट पर चल रहे धरने में सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे भी शामिल हुए।

धरना स्थल पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि सवर्ण समाज की आवाज अब देशभर में उठ रही है और सवर्ण क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि समाज अपने अधिकारों और समान अवसर की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहा है।

चौबे ने आगरा में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज की घटना की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीपी द्वारा लाठीचार्ज नहीं करने के निर्देश के बावजूद संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं। उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर को निलंबित करने और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

समान अवसर और मेरिट के सम्मान की मांग

सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि दलित समाज के शोषण के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन सवर्ण समाज के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या शोषण नहीं होना चाहिए। उन्होंने समान अवसर और योग्यता यानी मेरिट के सम्मान की मांग उठाते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों को भी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने यूजीसी के प्रस्तावित प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले कथित उत्पीड़न और भेदभाव को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से संबंधित प्रावधानों को वापस लेने की मांग की।

आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग

चौबे ने कहा कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से की गई थी। उनका कहना था कि जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर विकास की मुख्यधारा में आ चुके हैं, उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर करने पर विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने आरक्षण का लाभ एक ही स्तर पर दिए जाने की मांग करते हुए शिक्षा, प्रवेश, नौकरी और पदोन्नति में लगातार आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सभी वर्गों के लिए कटऑफ में समानता की मांग करते हुए कहा कि प्रतिभा और योग्यता का सम्मान होना चाहिए।

चौबे ने कहा कि प्रतिभा को नजरअंदाज करने से युवाओं में निराशा और कुंठा बढ़ सकती है। उनके अनुसार, किसी भी देश के विकास के लिए योग्य युवाओं को समान अवसर मिलना जरूरी है।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना

धरना आयोजकों ने कहा कि उनका आंदोलन अनिश्चितकालीन है और सरकार द्वारा उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए जाने तक जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सवर्ण होना अपराध नहीं है और सवर्ण समाज भी देश का समान नागरिक है।

धरना स्थल पर वक्ताओं ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार, सवर्ण समाज के लिए संवैधानिक आयोग के गठन, समान अवसर तथा यूजीसी के कथित दमनकारी प्रावधानों को वापस लेने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।