रशियन भौजी बोलीं- "मुझे लगा था शादी के बाद घूमूंगी, लेकिन यहां तो सुबह से रात रोटी बनती है "पति ने खेला ऐसा खेल, कमाई सुन रहेंगे दंग"...
आज आप मिलिए हमारी रशियन भौजी से !!
शादी से पहले मैडम को शायद लगता था कि अगर जिंदगी किसी भारतीय ब्लॉगर के साथ बितानी है, तो हर दिन किसी नए पहाड़ पर होगा।
सुबह उठो, पहाड़ों की तरफ निकलो…
बर्फ देखो…सुंदर-सुंदर तस्वीरें खिंचवाओ…
फिर शाम को फोटो पर कैप्शन लगाओ-"माय लव, माय लाइफ!"
लेकिन जनाब…
शादी के बाद जब रूस की बर्फीली वादियों से निकलकर भौजी भारत पहुंचीं, तो जिंदगी ने ऐसा यू-टर्न लिया कि इंस्टाग्राम के सारे सपने धरे के धरे रह गए।
पहाड़ों की जगह मिला चूल्हा।
हाथ में कैमरे की जगह बेलन।
और सुबह के रोमांटिक नाश्ते की जगह सवाल-
"भौजी, आज रोटी कितनी बनानी है?"
अब कल्पना कीजिए, हमारी रशियन भौजी मिट्टी के चूल्हे के सामने बैठी हैं। चारों तरफ धुआं ही धुआं है। आंखों में पानी आ रहा है और हाथ में बेलन घूम रहा है।
भौजी कैमरे की तरफ देखकर जैसे मन ही मन कह रही हों-
"मैं रूस से इंडिया घूमने आई थी या रोटी बेलने की ट्रेनिंग लेने?"
और फिर शुरू होता है असली भारतीय गृहस्थी का पाठ।
सुबह रोटी…
दोपहर रोटी…शाम को फिर रोटी!
बीच में झाड़ू-पोछा, बर्तन और कपड़े भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार।
भौजी शायद सोच रही होंगी कि शादी से पहले उन्हें जिस "कपल गोल्स" का सपना दिखाया गया था, उसमें किसी ने "गोल रोटी" नहीं बताई थी!
लेकिन ठहरिए…
कहानी में असली ट्विस्ट अभी बाकी है।
जिस चूल्हे और रोटी को देखकर भौजी परेशान हो रही थीं, वही आगे चलकर उनकी कमाई का जरिया बन गया।
पति ने कैमरा निकाला और बोला-
"भौजी, एक बार फिर से रोटी बेलो… लेकिन इस बार थोड़ा कैमरे की तरफ देखकर।"
भौजी ने शायद सोचा होगा-चलो, पति की बात है, कर देते हैं।
कैमरा ऑन हुआ।
भौजी ने बेलन उठाया।
चूल्हे पर रोटी डाली।
रोटी फूली…
कैमरा घूम गया…
और इंटरनेट पर वीडियो पहुंच गया!
बस फिर क्या था?
लोगों को रशियन भौजी का देसी अंदाज पसंद आने लगा। किसी को उनका चूल्हा अच्छा लगा, किसी को उनकी देसी रोटी और किसी को पति-पत्नी की नोकझोंक।
धीरे-धीरे यही रोजमर्रा की जिंदगी कंटेंट बन गई।अब जो काम घर में सामान्य तौर पर होता है, वही कैमरे के सामने कहानी बन जाता है।
भौजी रोटी बेलती हैं तो वीडियो।
भौजी खेत में जाती हैं तो वीडियो।
भौजी साड़ी पहनती हैं तो वीडियो।
भौजी चूल्हे पर खाना बनाती हैं तो वीडियो।
और पति पीछे से कैमरा लेकर तैयार-
"भाइयों और बहनों, आज देखिए हमारी रशियन भौजी क्या कर रही हैं!"
सबसे मजेदार बात यह है कि जिस जिंदगी को देखकर भौजी कभी सोचती होंगी कि "मेरे साथ ये क्या हो गया?", उसी जिंदगी के वीडियो देखने के लिए लोग इंटरनेट पर इंतजार करने लगे।
सोशल मीडिया पर ऐसे कई ग्रामीण और पारिवारिक व्लॉग आज लोगों के बीच खूब लोकप्रिय हैं और कुछ लोकप्रिय क्रिएटर्स अच्छी-खासी कमाई भी करते हैं। हालांकि किसी खास परिवार की हर महीने की कमाई कितनी है, यह बिना प्रमाण के निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा।
यानी कहानी की असली सीख ये है कि आज के दौर में जिसे आप घर का रोज का काम समझ रहे हैं, कोई दूसरा उसी को कंटेंट बनाकर कमाई का जरिया बना सकता है।
भौजी को चाहिए था पहाड़…
मिला चूल्हा।
चाहिए थीं रोमांटिक तस्वीरें…
मिला बेलन।
सोचा था घूमना-फिरना…
मिल गया व्लॉग!
और अब हालत ये है कि भौजी रोटी बेलती हैं और जनता मोबाइल पर बैठकर कमेंट करती है-
"भौजी, अगली वीडियो कब आएगी?"
इसे कहते हैं भाई साहब…
बेलन भी अपना, चूल्हा भी अपना और कमाई का रास्ता भी अपना!