आंख, कान, नाक या मुंह? मृत्यु के समय किस द्वार से आत्मा निकलने पर मिलता है स्वर्ग और कहां नर्क !! जानिए इस लेख में...
धर्म डेस्क, केसरी न्यूज 24। हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा अजर अमर है। आत्मा एक शरीर को त्यागकर दूसरे में प्रवेश करती है। आत्मा की इस यात्रा में कई चरण तो होते ही हैं और कर्मों के हिसाब से ही अगला जन्म होता है।जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। जन्म और मृत्यु के सभी चरणों के बारे में गरुड़ पुराण कुछ नियम बताता है और लोग उसका अनुसरण करते हुए ही सभी संस्कारों को निभाते हैं।
यही नहीं गरुड़ पुराण में आत्मा की एक यात्रा से जुड़े कुछ रहस्य भी बताए गए हैं। इस ग्रंथ में भगवान विष्णु अपने वाहन गरुड़ को आत्मा से जुड़ी कई बातों के बारे में बताते हैं और यह भी बताते हैं कि मृत्योपरांत आत्मा शरीर के अलग-अलग नौ अंगों से निकल सकती है। इन्हें आत्मा के निकलने का द्वार बताया गया है। आइए आपको बताते हैं आत्मा के सभी द्वारों के बारे में और कौन से अंग से आत्मा निकलने पर स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
प्राण निकलने के अलग-अलग द्वार कौन से हैं?
गरुड़ पुराण में इस बात का उल्लेख है कि हमारे शरीर के नौ ऐसे अंग हैं जिनकी तुलना आत्मा के बाहर निकलने के द्वारों से की गई है। ये द्वार हैं- दोनों आंखें, दोनों कान, मुंह, दोनों नासिकाएं और शरीर के दोनों उत्सर्जन अंग।
ऐसा कहा जाता है कि मृत्यु के समय आत्मा इन्हीं में से किसी द्वार से निकलती है। इनमें से कुछ ऐसे द्वार हैं जिनसे आत्मा के बाहर निकलने को शुभ माना जाता है और ऐसी आत्मा स्वर्ग जाती है, वहीं कुछ हिस्सों से आत्मा निकलने को नर्क की ओर प्रस्थान करने का मार्ग बताया गया है।
आपके जीवन के कर्म तय करते हैं कि किस द्वार से निकलेगी आत्मा
व्यक्ति जीवन पर्यन्त जो भी कर्म करता है उससे ही यह तय होता है कि वो किस द्वार से बाहर निकलेगी। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति जीवनभर अपने कर्तव्यों को भली भांति निभाता है उसकी मृत्यु के बाद आत्मा ऐसे अंग से बाहर जाती है जो उसे स्वर्ग की और ले जाएं। वहीं पाप कर्म करने वाले व्यक्ति की आत्मा ऐसे द्वार से बाहर निकलती है जो उसे नर्क की ओर ले जाए।
आत्मा को कौन सा द्वार स्वर्ग या नर्क ले जाता है?
ऐसा कहा जाता है कि जिस व्यक्ति के प्राण नाक, मुंह या आंखों से निकलते हैं उनकी आत्मा स्वर्ग जाती है। ऐसे व्यक्ति ने जीवन में हमेशा धर्म से जुड़े कर्म किए होते हैं या फिर अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन किया होता है।
कहा जाता है कि सभी पुण्य आत्माओं और ऋषि-मुनियों के प्राण मुख, नेत्र, नासिका, कान या मस्तक के ऊपरी हिस्से से निकलते हैं। वहीं जीवन में पाप करने वाले व्यक्ति के प्राण बहुत कष्ट के साथ विसर्जन मार्गों से निकलते हैं। इन द्वारों से जब प्राण निकलते हैं तो आत्मा को अत्यंत कष्ट के साथ बाहर आना पड़ता है और उस व्यक्ति को अत्यंत पीड़ा भी होती है।
कई बार मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की आंखें खुली रहती हैं और ऐसे लोगों के प्राण आंखों के रास्ते तो निकलते हैं, लेकिन वो पारिवारिक मोह में इतने लिप्त होते हैं कि उनकी आत्मा मृत्यु के बाद भी परिवार के मोह को छोड़ नहीं पाती है और खुली आंखों से सबको देखना चाहती है।
मृत्यु के बाद आत्मा किसी भी द्वार से क्यों न निकले आत्मा की यात्रा के लिए आपके जीवन के अच्छे-बुरे कर्म ही जिम्मेदार माने जाते हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। "केसरी न्यूज 24" यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न करें।