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भाई की जगह मेडिकल देने पहुंचा जुड़वां, पुलिस भर्ती में बायोमेट्रिक जांच ने खोला फर्जीवाड़े का राज, दोनों भाइयों पर दर्ज केस...

भाई की जगह मेडिकल देने पहुंचा जुड़वां, पुलिस भर्ती में बायोमेट्रिक जांच ने खोला फर्जीवाड़े का राज, दोनों भाइयों पर दर्ज केस...

कानपुर, न्यूज। उत्तर प्रदेश के कानपुर में चल रही पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी का एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। वर्दी पहनने की चाहत में दो जुड़वां भाइयों ने अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने की ऐसी साजिश रची कि पहली नजर में कोई भी गच्चा खा जाए। 

एक भाई की लंबाई तय मानकों से कम निकली तो उसने दोबारा मेडिकल जांच कराने के बहाने अपनी जगह अधिक लंबाई वाले अपने जुड़वां भाई को मैदान में उतार दिया। यह पूरा घटनाक्रम कानपुर पुलिस लाइन में आयोजित शारीरिक मानक परीक्षा के दौरान घटा। 

हुबहू एक जैसा चेहरा और एक जैसे कपड़े पहनकर रची गई यह चालाकी शुरू में तो सफल दिख रही थी, लेकिन आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीक और अधिकारियों की सतर्कता ने इस पूरे खेल का भंडाफोड़ कर दिया।

एक जैसी शक्ल का उठाया फायदा

आगरा का रहने वाला अभ्यर्थी भूपेंद्र लिखित परीक्षा पास करने के बाद शारीरिक नापजोख में शामिल होने पहुंचा था। शुरुआती जांच में उसकी लंबाई 166.4 सेंटीमीटर और छाती 79 सेंटीमीटर दर्ज की गई, जो मानक से कम होने के कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया।
भर्ती नियमों के तहत अभ्यर्थी को दोबारा जांच की अपील करने का अधिकार होता है, और भूपेंद्र ने इसी नियम का सहारा लेकर दोबारा नापजोख के लिए आवेदन किया। यहीं से दोनों भाइयों के फर्जीवाड़े का असली नाटक शुरू हुआ।

बायोमेट्रिक ने खोली पोल

दोबारा जांच की प्रक्रिया के दौरान भूपेंद्र की जगह उसका जुड़वां भाई भूपेश बिल्कुल एक जैसे कपड़े पहनकर और वही सामान लेकर अधिकारियों के सामने पेश हुआ। जब दोबारा लंबाई नापी गई तो वह 169.6 सेंटीमीटर निकली।

अचानक 3.2 सेंटीमीटर का इतना बड़ा अंतर देखकर जांच अधिकारियों के कान खड़े हो गए। हालांकि, तस्वीरों और चेहरे का मिलान करने पर दोनों की शक्ल पूरी तरह से एक जैसी लग रही थी, जिससे मामला पहली नज़र में पकड़ में नहीं आया, लेकिन अधिकारियों का संदेह दूर नहीं हुआ।

बायोमेट्रिक जांच से बेनकाब हुआ सच

संदेह गहराते ही अधिकारियों ने तुरंत अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक जांच कराने का फैसला किया। जब फिंगरप्रिंट और आंखों के रेटिना का मिलान कराया गया तो सिस्टम ने रिकॉर्ड से मेल खाने से साफ इनकार कर दिया। बायोमेट्रिक मिसमैच होते ही दोनों भाइयों की पूरी प्लानिंग धराशायी हो गई। कड़ाई से की गई पूछताछ में सच सामने आ गया कि नापजोख कराने आया युवक भूपेंद्र नहीं, बल्कि उसका भाई भूपेश था। योजना यह थी कि भूपेश से ज्यादा लंबाई दर्ज कराने के बाद बाहर निकल जाएगा और भूपेंद्र वापस उसकी जगह ले लेगा।

पुलिस ने दोनों को किया गिरफ्तार

मामले का खुलासा होते ही पुलिस ने परिसर के बाहर मौजूद मुख्य अभ्यर्थी भूपेंद्र को भी तुरंत हिरासत में ले लिया। कोतवाली पुलिस ने पुलिस लाइन के सब-इंस्पेक्टर की तहरीर पर दोनों भाइयों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से पहचान और शैक्षणिक दस्तावेजों के साथ दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। चेहरे की समानता का फायदा उठाकर सिस्टम को धोखा देने की यह कोशिश आखिरकार तकनीक की मुस्तैदी के आगे नाकाम साबित हुई।