कलाई पर बंधी राखी के धागे भी नहीं टूटे थे कि.. सत्य निकेतन हादसे ने बुझा दिए दो घरों के इकलौते चिराग, शव आज परिजनों को सौंपे गए..
नई दिल्ली, न्यूज। रक्षाबंधन पर बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी। उस समय किसे पता था कि यह राखी का धागा भाई-बहन के रिश्ते की आखिरी निशानी बन जाएगा। राखी के धागे अभी टूटे भी नहीं थे कि सत्य निकेतन हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए।
हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित जहाज और अक्षत सिंह यादव अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। दोनों पढ़ाई का सपना लेकर करीब दो साल पहले दिल्ली आए थे, लेकिन एक हादसे ने उनके परिवारों के सारे सपने छीन लिए। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजन को सौंप दिए हैं।
हादसे से कुछ घंटे पहले ही पहुंचा था दिल्ली
मध्य प्रदेश के देवास निवासी अर्पित जहाज आत्मा राम कालेज में बीकाम द्वितीय वर्ष का छात्र था। रक्षाबंधन पर वह छुट्टी लेकर घर गया था। बहन से राखी बंधवाने और परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद शनिवार को वह दिल्ली के लिए रवाना हुआ। रविवार सुबह करीब आठ बजे वह अपने होस्टल पहुंचा। वहां पहुंचते ही उसने मां को फोन किया और कहा, 'मां, मैं पहुंच गया हूं।'
बेटे के सकुशल दिल्ली पहुंचने की खबर सुनकर मां ने राहत की सांस ली। उन्हें क्या पता था कि बेटे की यह आवाज आखिरी बार सुनाई है। होस्टल पहुंचने के कुछ ही घंटे बाद अर्पित जिस इमारत में रहता था, वह भरभराकर गिर गई। रविवार दोपहर करीब दो बजे उसके दोस्तों ने पिता को फोन कर बताया कि इमारत गिर गई है और अर्पित का कुछ पता नहीं चल रहा है। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। स्वजन तुरंत फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुए। एम्स ट्रामा सेंटर पहुंचने पर उन्हें बेटे का शव कफन में लिपटा मिला।
पढ़ाई पूरी कर बेहतर भविष्य बनाना चाहता था अर्पित
अर्पित के परिवार में माता-पिता और एक बड़ी बहन है। उसके पिता कार चालक हैं। परिवार को बेटे से बड़ी उम्मीदें थीं। वह पढ़ाई पूरी कर बेहतर भविष्य बनाना चाहता था। जिस पिता ने बेटे को पढ़ने और कुछ बनने के लिए दिल्ली भेजा था, वह बेटे को इस हालत में देखकर खुद को संभाल नहीं सके। मां का रो-रोकर बुरा हाल था। बड़ी बहन भी भाई की कलाई पर बांधी गई राखी को याद कर फूट-फूटकर रो रही थी। कुछ दिन पहले तक जिस भाई की लंबी उम्र की कामना की थी, अब उसी भाई का शव सामने था।
दोनों परिवारों के इकलौते बेटे थेवहीं मध्य प्रदेश के कटनी के रहने वाले अक्षत सिंह यादव भी पीजीडीएवी कॉलेज में बीए प्रोग्राम द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह भी करीब दो साल पहले पढ़ाई के लिए दिल्ली आया था। अक्षत 31 अगस्त को घर जाकर बहन से राखी बंधवाने के बाद वापस दिल्ली लौटा था। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी कर वह उनके सपनों को पूरा करेगा, लेकिन हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया।
बहन का सवाल- अब किसे राखी बांधूंगी
अक्षत की मौत की खबर सुनकर उसका परिवार मोर्चरी के बाहर बेसुध था। मां श्वेता बार-बार बेटे को याद कर बेहोश हो रही थीं। पिता मानता सिंह यादव आंखों से निकलते आंसुओं को रोक नहीं पा रहे थे। लेकिन सबसे ज्यादा दर्द उसकी छोटी बहन अदिति के चेहरे पर था।
दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली अदिति बार-बार अपने भाई को याद कर रो रही थी। उसकी जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल था कि अब मैं किसे राखी बांधूंगी? अदिति का यह सवाल वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर रहा था। जिस राखी के त्योहार पर घर में भाई-बहन के प्यार की खुशियां थीं, वही राखी कुछ ही दिनों में परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई।