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'अमेरिका के सामने PM मोदी सरेंडर', UPI चार्ज पर भड़की कांग्रेस, राहुलगांधी बोले-अब डिजिटल लूट'की तैयारी...

'अमेरिका के सामने PM मोदी सरेंडर', UPI चार्ज पर भड़की कांग्रेस, राहुलगांधी बोले-अब डिजिटल लूट'की तैयारी...

नईदिल्ली न्यूज। यूपीआई (UPI) से होने वाले डिजिटल लेन-देन पर शुल्क को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ गया है। केंद्र सरकार के हालिया नोटिफिकेशन के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि सरकार ने चोर दरवाजे से UPI पेमेंट्स पर टैक्स ठोकने का खाका तैयार कर लिया है। राहुल गांधी का दावा है कि यह फैसला अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने और वाशिंगटन के दबाव में लिया गया है।

राहुल गांधी का सनसनीखेज आरोप: अमेरिकी कंपनियों के आगे घुटने टेके

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने का रास्ता साफ कर दिया गया है। 

राहुल गांधी ने कहा,

"भले ही ₹2,000 से बड़े लेन-देन की संख्या कुल आंकड़ों का केवल 5 प्रतिशत हो, लेकिन वैल्यू के हिसाब से कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं से आता है। सरकार भले कहे कि ग्राहकों से फीस नहीं लेंगे, लेकिन जब दुकानदारों पर टैक्स लगेगा तो वे कीमतें बढ़ाकर पैसा आम जनता की जेब से ही निकालेंगे। अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर पॉलिसी का विरोध कर रही थीं। ट्रेड डील की तरह ही पीएम मोदी ने अमेरिकी दबाव के सामने सरेंडर कर दिया है।"

मल्लिकार्जुन खड़गे से जयराम रमेश तक ने क्या कहा?

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी केंद्र की नीति पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने इसे महंगाई की मार झेल रही जनता पर नया 'डिजिटल टैक्स' करार दिया। 

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,

"दस साल पहले नोटबंदी का झटका देकर कहा गया था कि डिजिटल और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब उसी डिजिटल पेमेंट पर डाका डाला जा रहा है। थोक महंगाई पहले ही 10 फीसदी के करीब है। वित्त मंत्री ने संसद में वादा किया था कि यूपीआई फ्री रहेगा, लेकिन अब ₹5,000 के लेन-देन पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 तक वसूलने की रिपोर्ट सामने आ रही हैं। जनता की बची-कुची बचत को खत्म करने का पूरा प्लान तैयार है।"

जयराम रमेश ने उठाए सवाल: संसद में जबरन कानून पास कराकर तोड़ी गारंटी

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने याद दिलाया कि पार्टी ने 6 अगस्त 2026 को ही इस खतरे से आगाह किया था। उन्होंने कहा कि संशोधित पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत जारी ताजा गजट नोटिफिकेशन ने मुफ्त यूपीआई की कानूनी गारंटी खत्म कर दी है।

जयराम रमेश बोले,

"सरकार ने ₹2,000 से कम के भुगतानों को तो सुरक्षित किया है, लेकिन उससे ऊपर के लेन-देन पर कोई सुरक्षा नहीं दी है। कल को दूसरा नोटिफिकेशन जारी करके यह सीमा भी खत्म की जा सकती है। आम लोगों के P2P यानी एक-दूसरे को भेजे जाने वाले पैसों पर भी कल को चार्ज लग जाए तो अचरज नहीं होगा। क्या यह सब राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने और अमेरिकी कंपनियों के लिए रास्ता साफ करने के लिए हो रहा है?"

सरकार और वित्त मंत्री की सफाई: यूजर से नहीं कटेगा 1 रुपये भी

कांग्रेस के इन आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही रुख साफ कर दिया था। सरकार का कहना है कि 14 सितंबर के नोटिफिकेशन से ₹2,000 तक के यूपीआई लेन-देन और RuPay डेबिट कार्ड पूरी तरह सुरक्षित हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "भ्रम फैलाने से पहले सच समझें।

एमडीआर (MDR) केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होता है, आम यूजर या ग्राहकों पर नहीं। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने सिस्टम को सुरक्षित, मजबूत और हाईटेक बनाने में करेंगी। इसका फायदा घूम-फिरकर यूपीआई इस्तेमाल करने वाले हर यूजर को ही मिलेगा।"

₹2,000 के बाद UPI पर क्या होगा?

सबसे पहले पूरा मामला समझना जरूरी है। वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर के राजपत्र नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कोई बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतान या रुपे डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर सीधे या परोक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकता। इसका मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 यूपीआई की नई अधिकतम सीमा बन गई है। उससे ज्यादा रकम का भुगतान किया जा सकता है।

पेच यहां है। नोटिफिकेशन में ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई भुगतान को इसी तरह शुल्क-मुक्त रखने की बात नहीं कही गई है। यानी भविष्य में ऐसे भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाने की गुंजाइश बनी है। अभी इसकी दर तय नहीं हुई है और न ही यह तय है कि किन कारोबारियों पर इसे लागू किया जाएगा।