Viral Video: US लड़की ने दुनिया को दिखाया भारत का असली सच, बोली-आपके साथ अन्याय हुआ वरना आप हमेशा से अमीर थे...
India's Real Picture: एक अमेरिकी लड़की ने दुनिया के सामने भारत का निष्पक्ष तस्वीर पेश कर दिल जीत लिया। उनके इंस्टाग्राम पोस्ट को देखकर आप भी गदगद हो जाएंगे। दरअसल, आज भी दुनिया भर के देशों में भारत की छवि को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जाती है। कहा जाता है कि भारत आज भी बहुत गरीब है, यहां साफ-सफाई नहीं रहती। यहां के लोग गंदे होते हैं। वगैरह-वगैरह.. लेकिन अमेरिकी इन्फ्लुएंसर जेमा फेरर ने इंस्टाग्राम पर इन स्टीरियोटाइप मिथ की धज्जियां उघेड़ दी।
जेमा ने बताया है कि भारत सदियो से दुनिया में सबसे अमीर देश था लेकिन वक्त ने उसके साथ अन्याय किया। हजारों साल तक उसे लूटा गया और आखिर में अंग्रोजी उपनिवेशवाद ने भारत की रीढ़ ही तोड़ दी। इसके बावजूद आज दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं जो भारत की देन है और भारत इन सबसे उबर रहा है पर दुनिया को अब भी इन बातों का पता नहीं है। जेमा फेरर ने तीन पार्ट में यह वीडियो बनाया है जिसमें भारत की सच्ची जड़ों को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की है। आइए जेमा ने वीडियो में भारत के बारे में क्या कहा, इसे जानते हैं।
सदियों से भारत नस्लीय भेदभाव का शिकार
जेमा फेरर ने तीन पार्ट में इस वीडियो को बनाया है. उन्होंने भारत की सदियो पुरानी सांस्कृति विरासत को उजागर करते हुए बताया है कि भारत के खिलाफ नस्लीय भेदभाव इतने चरम तरीके से हुआ है कि आज भी यह औपनिवेशिक मानसिकता से परे नहीं है. दुनिया आज भी भारत के बारे में बहुत गलत चीजें जानती है. जेमा कहती हैं, आपके साथ तगड़ा वाला नस्लवाद हुआ है। यानी आपके रंग के आधार पर ब्रिटेन ने आपके साथ भेदभाव किया है. लेकिन इससे भी बुरी बात यह है कि आपको इस बात का अहसास भी नहीं हुआ।
भारत को हजार सालों तक आतातायियों ने लूटा और रक्तपात किया है. आखिर में ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने आपको पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. इसके बावजूद आज भारत अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखा हुआ है. हम इस वीडियो में भारत के बारे में गलत धारणाएं, भारत से जुड़े विरोधाभासों पुरानी रूढ़िवादिताओं और गलतफहमियों की पड़ताल करेंगे।
भारत को स्टीरियोटाइप के चश्मे से देखा
अपने दूसरे वीडियो में जेमा ने कहा है कि भारत को लगातार गरीबी, कॉल सेंटर में हास्यास्पद उच्चारणों, साफ-सफाई की कमी जैसे स्टीरियोटाइप्स के चश्मे से ही देखा और दिखाया गया है. लेकिन ठीक इसी समय भारत की संस्कृति के कई गहरे तत्वों जैसे कि योग, ध्यान, पॉप कल्चर, लैंडस्कैप, टूरिज्म को समेटे हुए हैं. खास बात यह है कि पश्चिमी जगत खुले दिल से याग और मेडिटेशन को अपनाया हुआ है और इसका जमकर व्यसायीकरण भी किया है. अकेले योग में अरबों डॉलर का कारोबार खुल गया है।
भारत की कला और शिल्प दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाए हुआ है। भारत का सूती वस्त्र विश्व के हर कोने में मौजूद हैं लेकिन दुनिया को इस बात का पता नहीं कि ये चीजें कहां से आई है. वास्तव में, भारत की रचनात्मकता, कारीगरी और श्रम वैश्विक उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं. लेकिन हम किसी संस्कृति का जश्न तब तक नहीं मना सकते, जब तक हम उसका प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को उनके इंसानी अधिकार और सम्मान न दें।
अन्याय के खिलाफ भी अहिंसा का रास्ता चुना
जेमा भारतीयों से कहती हैं कि आप काफी दयालु और सहिष्णु रहे हैं लेकिन आपने शायद इस बात को महसूस नहीं किया है कि भारत गरीब नहीं है बल्कि भारत को सदियों से गरीब बनाया गया है. भारत दुनिया की सबसे बड़ी टेक्सटाइल ताकतों में से एक था. यहां का सूती कपड़ा, रेशम और मलमल दुनिया भर में सबसे बेहतरीन और सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कपड़ों में शामिल थे. लेकिन ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने इस सबको तहस नहस कर दिया।
अंग्रेजों ने इस तरह से नीति बनाई कि भारतीय कपड़ा उद्योग को तबाह कर दिया. लाखों कारीगर और बुनकरों को अपनी रोजी-रोटी से हाथ धोना पड़ा. सदियों से जो उद्योग श्रेष्ठता का प्रतीक था वह कुछ सालों में धाराशायी हो गया. ऐसा नहीं था कि भारत ने बेहतरीन गुणवत्ता वाला सामान बनाना बंद कर दिया था, बल्कि किसी और ने इस पर कब्ज़ा कर लिया था ताकि वे इससे मुनाफा कमा सकें।
इसका सबसे दिल छू लेने वाला पहलू यह है कि जब इस अन्याय के खिलाफ लड़ने का समय आया तो भारत ने हथियार का रास्ता नहीं चुना बल्कि गांधी के नेतृत्व में अहिंसा का रास्ता चुना. भारत ने दुनिया को दिखाया कि अत्यधिक उत्पीड़न और दमन के बावजूद सबसे बड़ी ताकत बिना हथियार उठाए बदलाव ला सकता है. यह इतिहास का सबसे बड़ा अहिंसक बदलाव बना।
फैशन में अपना हक जता रहा है भारत
अपने तीसरे वीडियो में जेमा ने बताया कि आज हाई फैशन की दुनिया में भारत का प्रवेश हो चुका है और हर जगह भारत की अलग छाप दिखती है. बेशक औपनिवेशिक शासन ने न केवल कच्चे माल का दोहन किया बल्कि भारत के पूरी रचनात्मक पारिस्थितिकी तंत्र यानी क्रिएटिव इकोसिस्टम को भी तबाह कर दिया था. इसके बावजूद आज भारत अपनी इस कलाकृति तथा निरंतर हो रहे नए आविष्कारों के दम पर फैशन की दुनिया में उस स्थान पर फिर से अपना हक जता रहा है जो हमेशा से उसका था।
भारतीय फैशन एक अद्भुत विविधता और सरलता को पेश कर रहा है जिसमें ट्राइबल, ज्यामितिय आकार, फूलों की डिजाइनों से सजा फ्लोरल मैक्समिलिस्ट जैसी उत्कृष्ट कला की झलक मिलती है. भारतीय शिल्पकार एंब्रायडरी पैटर्न के जरिए अपनी आत्मकथा बयां करते हैं. भारतीय कलाकर यह दिखाते हैं कि चाहे कपड़ा सीधा हो या उल्टा जब उस पर ड्रैपिंग, फॉल्स और मूवमेंट को पिरोया जाता है तो वह किसी भी रूप में जीवंत हो उठता है।