काशी में 3 से 5नवंबर तक संस्कृति संसद 2026: भारतीय संस्कृति और नई पीढ़ी पर संवाद...
वाराणसी, न्यूज। काशी संस्कृति संसद 2026: भारतीय संस्कृति, ज्ञान की परंपरा, सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों और नई पीढ़ी के संबंधों पर राष्ट्रीय चर्चा के लिए काशी में 3 से 5 नवंबर तक संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में होगा, जिसमें संतों, विद्वानों, संगठकों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, युवाओं और कलाकारों की भागीदारी होगी।
आयोजन का संचालन गंगा महासभा द्वारा अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस आयोजन में लगभग तीन हजार संतों के शामिल होने की उम्मीद है।
संस्कृति संसद का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें युवा संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, चित्रकला, फोटोग्राफी और विभिन्न प्रतियोगिताओं को भी शामिल किया गया है। इसके माध्यम से संस्कृति के आध्यात्मिक, बौद्धिक, सामाजिक और कलात्मक पहलुओं को साझा मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
संवाद के लिए छह प्रमुख कार्यक्रम
संस्कृति संसद 2026 में मुख्य संस्कृति संसद, Gen Z कॉन्क्लेव, संस्कृति उत्सव, चित्रकला प्रदर्शनी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता और बच्चों की चित्रकला जैसी सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। भारतीय संस्कृति पर राष्ट्रीय विमर्श में परंपरा, आधुनिकता और सामाजिक बदलाव के बीच संबंध महत्वपूर्ण विषय हैं। संस्कृति संसद में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की भागीदारी इन विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगी।
काशी में आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम विचार-विमर्श, युवा सहभागिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को एक साथ जोड़ता है। इसका उद्देश्य संस्कृति को केवल अतीत की विरासत के रूप में नहीं, बल्कि समाज, ज्ञान, कला और नई पीढ़ी से जुड़े विषय के रूप में प्रस्तुत करना है।
पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती जी, जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी, प्रोफेसर श्री राम नारायण द्विवेदी जी (महामंत्री- श्रीकाशी विद्वत परिषद्), श्री गोविन्द शर्मा जी (महामंत्री संगठन, गंगा महासभा) और श्री कैलाश आचार्य जी (कार्यकारी अध्यक्ष- आयोजन समिति) उपस्थित रहे।