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308 पहियों वाले 'राक्षस ट्रक' की अगली परीक्षा दो ओवरब्रिज, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पार कराने में इंजीनियरों के छूटेंगे पसीने...

308 पहियों वाले 'राक्षस ट्रक' की अगली परीक्षा दो ओवरब्रिज, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पार कराने में इंजीनियरों के छूटेंगे पसीने...

308 Wheel Truck News। 308 पहियों वाला विशालकाय 'राक्षस ट्रक' चार महीने के लंबे सफर के बाद अब एक और बड़ी चुनौती की ओर बढ़ चुका है। 200 टन से अधिक वजन का भारी औद्योगिक उपकरण लेकर लखीमपुर खीरी की ओर जा रहे इस महाट्रक की अगली परीक्षा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के दो ओवरब्रिज के नीचे से गुजरने की है। ट्रक अभी इन दोनों पुलों को पार नहीं कर पाया है, लेकिन इसे सुरक्षित निकालने के लिए इंजीनियरों और प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

दो ओवरब्रिज के नीचे कैसे बनेगा रास्ता?

गाजीपुर के मरदह क्षेत्र में हैदरगंज के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के दो ओवरब्रिज इस महाट्रक के रास्ते में आने वाले हैं. ट्रेलर की लंबाई, ऊंचाई और भारी वजन को देखते हुए सामान्य सड़क से इसे निकालना चुनौतीपूर्ण है. यही वजह है कि ओवरब्रिज के नीचे सड़क का हिस्सा तोड़कर गिट्टी और मिट्टी डालकर ट्रक के लिए रास्ता तैयार किया गया है. यानी इस बार सिर्फ ड्राइवर की कुशलता नहीं, बल्कि सड़क की ढाल, ट्रेलर की ऊंचाई और पुल के नीचे उपलब्ध जगह-हर चीज का सटीक आकलन करना होगा।

पहले भी कई जगह बदलना पड़ा रास्ता

इस 'राक्षस ट्रक' के सफर में यह पहली बड़ी तकनीकी चुनौती नहीं है. इससे पहले गाजीपुर के डांडीकला टोल प्लाजा पर भी ट्रेलर को निकालने के लिए लेन का हिस्सा तोड़कर वैकल्पिक रास्ता तैयार करना पड़ा था. गीली मिट्टी में ट्रक के फंसने के बाद भी टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इससे पहले वाराणसी में भी ट्रेलर पर लदा भारी उपकरण एक पुल के बीम से टकरा गया था, जिसके बाद रास्ता बदलकर उसे आगे ले जाया गया. ऐसे में अब पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के दो ओवरब्रिज पर टीम किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती।

308 पहिए, 200 टन से ज्यादा वजन और बेहद धीमी रफ्तार

इस महाट्रक की सबसे बड़ी खासियत ही इसकी चुनौती भी है. विशाल ट्रेलर पर भारी औद्योगिक उपकरण लदा है और इसका कुल वजन 200 टन से अधिक बताया जा रहा है. अत्यधिक वजन और आकार के कारण यह सामान्य ट्रकों की तरह रफ्तार नहीं पकड़ सकता. रिपोर्टों के मुताबिक यह रोजाना करीब 10 से 15 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पा रहा है. यही वजह है कि इसके रास्ते में आने वाली छोटी-सी बाधा भी कई घंटे या कभी-कभी पूरे दिन का समय बढ़ा सकती है।

बिजली के तार से लेकर साइन बोर्ड तक, हर बाधा की निगरानी

ट्रक के साथ 40 से 50 तकनीकी और सहायक कर्मचारियों की टीम चल रही है. आगे बढ़ने से पहले रास्ते का निरीक्षण किया जाता है. जहां बिजली के तार, फुटओवर ब्रिज, साइन बोर्ड या दूसरी संरचनाएं बाधा बन रही हैं, वहां उन्हें हटाने या ऊंचा करने की तैयारी की जा रही है. मऊ की सीमा तक पहुंचने के बाद भी प्रशासन ने दोहरीघाट तक रास्ते में लगे साइन बोर्डों को ऊंचा कराने का काम शुरू कराया है, ताकि ट्रेलर के गुजरने में कोई रुकावट न आए।

मऊ के बाद गोरखपुर की ओर बढ़ेगा महाट्रक

ताजा जानकारी के मुताबिक 308 पहियों वाला ट्रेलर मंगलवार शाम मऊ सीमा से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले हैदरगंज गांव के पास पहुंचकर रुका. मार्ग को पूरी तरह साफ करने के बाद इसे आगे बढ़ाया जाना है. इसके बाद ट्रेलर मऊ में करीब एक-दो दिन रह सकता है और फिर कोपागंज, घोसी, अमिला और दोहरीघाट बाईपास होते हुए गोरखपुर की ओर बढ़ेगा।

चार महीने से जारी है राक्षस ट्रक का सफर

ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से शुरू हुआ यह सफर अब करीब चार महीने का हो चुका है. ट्रेलर लखीमपुर खीरी स्थित पीएलए प्लांट के लिए भारी औद्योगिक उपकरण लेकर जा रहा है. अधिकारियों का अनुमान है कि यह दशहरा तक अपनी अंतिम मंजिल तक पहुंच सकता है. लेकिन उससे पहले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के ये दो ओवरब्रिज इस सफर का सबसे दिलचस्प पड़ाव बनने वाले हैं. रास्ता तैयार है, तकनीकी टीम मुस्तैद है और अब नजर इस बात पर है कि 308 पहियों वाला यह महाट्रक दो ओवरब्रिज की चुनौती को कितनी आसानी से पार कर पाता है।