अब आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं करेंगे प्राइवेट अस्पताल! डॉक्टर्स कर रहे नए नियमों का विरोध, क्या है मामला जानें?...
जबलपुर, न्यूज। मध्यप्रदेश में निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने का ऐलान किया है. एमपी नर्सिंग होम्स एसोसिएशन के मुताबिक, 8 अक्टूबर से एमपी के निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं करेंगे। दरअसल, सरकार ने 1 अक्टूबर से इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर के आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए NABH सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है. निजी अस्पताल संचालक इसी फैसले का विरोध कर रहे हैं।
नर्सिंग होम्स एसोसिएशन का कहना है कि सिर्फ चार महानगरों में NABH की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं है, जबकि प्रदेश के बाकी जिलों में अस्पतालों को इससे छूट दी गई है. एसोसिएशन के मुताबिक, छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए NABH सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया और इसमें होने वाला लाखों रुपये का खर्च बड़ी चुनौती है. अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बाद पिछले पांच से छह महीने से लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग भी की है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगों पर समाधान नहीं हुआ, तो 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर अस्पताल बंद करने का कदम भी उठाया जा सकता है. आईएमए अध्यक्ष अमरेंद्र पांडे ने कहा,"पूरे इंडिया में और कहीं नहीं है. न गुजरात में, न महाराष्ट्र में, न राजस्थान में, न छत्तीसगढ़ में. MP में नया निकाला. क्या इंसानों का इलाज सिर्फ जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर और भोपाल में होता है? बाकी जिलों में जानवर हैं क्या? "
अमरेंद्र पांडे ने आगे कहा, "मुख्यमंत्री साहब खुद उज्जैन से हैं. सिर्फ चार शहर में ही क्यों किया? हमारे यहां कोई नेता ही नहीं है. मतलब हम लोग त्रस्त हो के डॉक्टरी छोड़ के नेतागिरी में उतरेंगे? क्योंकि हमारे नेता कुछ बोलते ही नहीं. सिर्फ जबलपुर. काहे का पूरा देश? काहे का पूरा प्रदेश? मध्य प्रदेश… कितनी ब्लैकमेलिंग चल रही है, आप समझो यार. यह कौन सा नियम होता है ईस्ट इंडिया टाइप. प्रोटेस्ट सरकार की ईस्ट इंडिया टाइप पॉलिसी के खिलाफ है. NABH अपने आप में वॉलेनटरी स्कीम है, उसको सरकार ने जबरन में कंपलसरी बना दिया है।"
आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बिल पेंडिंग
अमरेंद्र पांडे ने आगे कहा, "हम एक सांकेतिक हड़ताल पर भी जा सकते हैं, क्योंकि केवल NABH एक विषय नहीं है. हमारी पेमेंट भी टाइम पर नहीं होती है. दूसरी तरफ से यह NABH का हमारे ऊपर प्रेशर बनाते हैं और 6-6 महीने तक पेमेंट नहीं करते. जो आवाज उठाता है उसके अस्पताल पर रेड कर देते हैं. सिर्फ जबलपुर में ही 70-80 करोड़ के आसपास का बिल पेंडिंग है. पूरे एमपी में 150-200 करोड़ की पेंडेंसी है. एग्जैक्ट फिगर्स तो मेरे पास नहीं हैं, क्योंकि वो तो सरकार ही बता सकती है. हमको आयुष्मान भारत का एक बार फिगर मिला था कि 1100 करोड़ की तब पेंडेंसी थी।"
अमीरों के पास भी है आयुष्मान कार्ड
अमरेंद्र पांडे ने कहा, "आपमें से कई लोग पूछते हैं कि आप लोग छोड़ क्यों नहीं देते आयुष्मान भारत? हम तो बोल रहे हैं कि आयुष्मान भारत को सारे प्राइवेट अस्पतालों में बंद कर दो. हम छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन अभी इन्होंने बदमाशी क्या की है? आयुष्मान भारत हर एक को बांट दिया है. 7 करोड़ में से 5.5 करोड़ जनता को आयुष्मान कार्ड बांटा है. रईस से रईस आदमी के पास आयुष्मान कार्ड है. मैं किसी का भी आयुष्मान कार्ड बना सकता हूं. अभी मैं आपका भी बनवा सकता हूं. अगर हमारे पास आयुष्मान नहीं रहता अस्पताल में, तो कोई इलाज कराने ही नहीं आता है. बड़े-बड़े नेताओं का फोन आता है कि इसका आयुष्मान कार्ड में क्यों नहीं कर रहे, उसका क्यों नहीं कर रहे।"