Delhi Electricity Bill: 17 दिन में एक मीटर के आए 4 बिजली के बिल, हर बार अलग यूनिट और रूपये हुए दर्ज़...
अजब गजब, न्यूज। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में बिजली बिल से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ही बिजली मीटर के लिए 17 दिनों के भीतर चार अलग-अलग बिल भेजे गए. चारों बिलों पर CA नंबर और पता एक ही है, लेकिन बिजली की यूनिट और बिल की रकम अलग-अलग है। उपभोक्ता विनोद मुद्गल ने इसे लेकर बिजली कंपनी से शिकायत की, लेकिन उनका कहना है कि चौथा बिल आने के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई।
विनोद मुद्गल के मुताबिक, बिजली मीटर उनकी मां के नाम पर रजिस्टर्ड है. उन्हें पहला बिल 1 अक्टूबर को मिला था. इसके बाद 7 अक्टूबर, 9 अक्टूबर और फिर 17 अक्टूबर को नया बिल भेजा गया. हर बिल में रीडिंग और रकम अलग थी।
17 दिनों में चार बार आया बिजली बिल
विनोद मुद्गल ने बताया कि पहला बिजली बिल 1 अक्टूबर को आया था. यह 36 दिनों का बिल था, जिसमें 153 यूनिट दर्ज थीं. इस बिल पर 'Not to Pay' यानी भुगतान नहीं करने की बात लिखी थी. इसके छह दिन बाद 7 अक्टूबर को दूसरा बिल आया. इसमें 394 यूनिट दिखाई गईं और 1,010 रुपये की रकम दर्ज थी. फिर 9 अक्टूबर को तीसरा बिल भेजा गया. यह 46 दिनों का बिल था. इसमें 694 यूनिट दर्ज थीं और बिल की रकम करीब 3,900 रुपये थी।
लगातार अलग-अलग बिल आने के बाद विनोद ने बिजली कंपनी के कस्टमर केयर में शिकायत की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत भेजी. उनका कहना है कि 17 अक्टूबर की सुबह उन्हें चौथा बिल मिल गया, लेकिन इसमें भी यूनिट को लेकर गड़बड़ी दिखाई दी।
चौथे बिल में भी यूनिट को लेकर सवाल
विनोद मुद्गल के अनुसार, चौथा बिल 32 दिनों का है. इसमें 483 यूनिट दर्ज की गई हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले 36 दिनों के बिल में 394 यूनिट दिखाई गई थीं, तो चार दिन कम अवधि वाले बिल में 483 यूनिट कैसे हो गईं। उनका कहना है कि चौथा बिल मिलने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. चारों बिलों में CA नंबर और पता एक ही है, लेकिन यूनिट और रकम अलग-अलग दर्ज हैं।
कस्टमर केयर में शिकायत के बाद भी नहीं मिला समाधान
विनोद ने बताया कि तीसरा बिल आने के बाद उन्होंने टाटा पावर के कस्टमर केयर में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत दर्ज होने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिला. उन्होंने दोबारा भी शिकायत की. इस बार कंपनी की तरफ से फोन आया, लेकिन समस्या का हल नहीं निकला।
इसके बाद उन्होंने तीन-चार दिन बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री पोर्टल पर ईमेल के जरिए शिकायत भेजी. विनोद के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय से जवाब आया और शिकायत मंत्री आशीष सूद के पास भेज दी गई. इसके बाद उन्हें चौथा बिल मिला, लेकिन उसमें भी यूनिट को लेकर सवाल बने रहे।
विनोद का कहना है कि उन्होंने कंपनी के कस्टमर केयर कर्मचारियों से किसी वरिष्ठ अधिकारी से बात कराने की मांग भी की थी. हालांकि, उनकी बात किसी वरिष्ठ अधिकारी से नहीं कराई गई। उनके मुताबिक, चौथा बिल आने के बाद भी कंपनी की तरफ से कोई फॉलो-अप कॉल नहीं आया।
जांच की मांग, दूसरे उपभोक्ताओं को लेकर भी उठाए सवाल
विनोद मुद्गल ने इस मामले की पूरी जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि ऐसी गड़बड़ी सिर्फ उनके बिल में हुई है या दूसरे उपभोक्ता भी इससे परेशान हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि अगर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में इसी तरह की गड़बड़ी हो रही है, तो यह गंभीर मामला हो सकता है. उन्होंने सब्सिडी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि बिजली कंपनी को अपना काम सही तरीके से करना चाहिए।
फिलहाल, विनोद मुद्गल के लगाए आरोपों और बिलों में अंतर को लेकर जांच की जरूरत है. मामले में बिजली कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब या जांच का नतीजा इस कंटेंट में नहीं दिया गया है. ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अलग-अलग बिल आने और यूनिट में अंतर की वजह क्या है।