एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का दबदबा !! जापान को 4-1 से चटाई धूल, छठी बार जीता खिताब...
नईदिल्ली, न्यूज। भारतीय हॉकी टीम ने घरेलू मैदान पर अपना दबदबा कायम रखते हुए शानदार प्रदर्शन किया है. पंजाब में खेले गए एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में भारत ने जापान को 4-1 से करारी शिकस्त देकर रिकॉर्ड छठी बार इस खिताब पर कब्जा जमा लिया है।
डिफेंडिंग चैंपियंस भारत के लिए इस खिताबी मुकाबले में शिलानंद, दिलप्रीत, जुगराज और विवेक ने शानदार गोल दागकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाते हुए भारतीय खिलाड़ियों ने जापानी डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और फाइनल मुकाबला अपने नाम कर लिया।
जापान ने तीसरे मिनट में काजुमासा मात्सुमोतो के गोल से बढ़त हासिल की थी जिसके बाद भारत की ओर से शिलानंद लाकड़ा (42वें मिनट), दिलप्रीत सिंह (48वें), जुगराज सिंह (53वें) और विवेक सागर प्रसाद (54वें) ने गोल किए. एशियाई खेलों के मौजूदा स्वर्ण पदक विजेता भारत ने टूर्नामेंट के पहले राउंड-रॉबिन लीग मैच में भी जापान को 4-1 से हराया था।
क्रेग फुल्टन के मार्गदर्शन में भारत ने इस टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए खिताब जीता। उसने लीग चरण के सभी 5 मैच जीते और सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया को 8-1 से करारी शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई. दूसरी ओर, जापान ने दूसरे सेमीफाइनल में मलेशिया के साथ मैच ड्रॉ रहने के बाद पेनल्टी शूटआउट में 5-3 से जीत दर्ज कर फाइनल का टिकट कटाया था।
इससे पहले भारत ने 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीता था. पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही भारतीय टीम ने इस जीत के साथ महाद्वीप में अपनी बादशाहत कायम रखी. मैच की शुरुआत भारत के अनुकूल नहीं रही. तीसरे मिनट में ही काजुमासा मात्सुमोतो ने गोल दागकर जापान को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी. इसके बाद भारतीय टीम पर दबाव आ गया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने जल्द ही वापसी की कोशिश शुरू कर दी।
अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच में खेल रहे उप-कप्तान हार्दिक सिंह ने मिडफील्ड में कमान संभाली और रक्षापंक्ति व अग्रिम पंक्ति के बीच शानदार तालमेल बिठाकर मौके बनाए. वहीं, जर्मनप्रीत सिंह ने डिफेंस में चट्टान की तरह डटकर जापानी हमलों को नाकाम किया. जापान ने 20वें मिनट में लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति ने जापानी कप्तान राइकी फुजीशिमा के प्रयासों को नाकाम कर दिया. इसके बाद भारत ने हमले तेज किए, लेकिन पहला हाफ समाप्त होने तक टीम 0-1 से पीछे ही रही।
हाफ टाइम के बाद भारतीय टीम नए इरादे के साथ मैदान पर उतरी। 33वें मिनट में भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे जापानी गोलकीपर किशो कुरोदा ने बचा लिया. इसके बाद 39वें मिनट में जापान को भी पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन शोता यामादा का शॉट बेकार गया। भारत ने लगातार दबाव बनाए रखा और 42वें मिनट में लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए। इसके बाद आदित्य अर्जुन लालागे के पास पर शिलानंद लाकरा ने रिबाउंड पर गोल दागकर भारत को 1-1 की बराबरी दिला दी।
बराबर होने के बाद चौथे क्वार्टर में भारत ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया. 48वें मिनट में हार्दिक सिंह के बेहतरीन मूव पर दिलप्रीत सिंह ने शानदार रिवर्स हिट से गोल कर भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी. इसके बाद 53वें मिनट में जुगराज सिंह ने भारत के तीसरे पेनल्टी कॉर्नर को ताकतवर ड्रैग-फ्लिक से गोल में बदलकर स्कोर 3-1 कर दिया। भारतीय आक्रमण का सिलसिला यहीं नहीं रुका. 54वें मिनट में विवेक सागर प्रसाद ने सर्कल के टॉप से जोरदार हिट लगाकर गेंद को नेट में उलझा दिया और भारत को 4-1 से आगे कर दिया. हुटर बजने से महज 12 सेकेंड पहले जापान को चौथा पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन कप्तान फुजीशिमा का शॉट बाहर निकल गया. इसके साथ ही भारत ने 4-1 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।