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प्रयागराज माघ मेला 2021 : बसंत पंचमी पर संगम में लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी, मां सरस्वती की पूजा
प्रयागराज । आज प्रयागराज में आस्था हर ओर नजर आ रही है। प्रयागराज माघ मेला में चौथे स्नान पर्व वसंत पंचमी पर संगम स्नान का सिलसिला आज मंगलवार को जारी है। गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में पुण्य की डुबकी लग रही है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालु भोर से स्नान, दान कर रहे हैं। सूर्योदय के बाद संगम के अलावा गंगा घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर वाग्देवी यानी मां सरस्वती की आराधना भी भक्त कर रहे हैं।
वसंत पंचमी पर गंगा के रामघाट, दशाश्वमेध घाट, दारागंज, गंगोली शिवालय, ओल्ड जीटी, फाफामऊ के अलावा अरैल के घाट पर स्नार्थियों की भारी भीड़ है। श्रद्धालु स्नान के बाद तीर्थपुरोहितों के निर्देशानुसार दान-पुण्य करके मनोवांछित फल की प्राप्ति की कामना कर रहे हैं।
मान्यता है कि वसंत पंचमी पर्व पर संगम में स्नान करके दान करने से भक्तों को दैहिक, दैविक व भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। ग्रह-नक्षत्रों की अद्भुत जुगलबंदी से स्नान पर्व का महत्व कई गुना बढ़ गया है। ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि पंचमी तिथि सोमवार की रात 2.45 बजे लग चुकी है। इसका प्रभाव पूरे दिन रहेगा। वसंत पंचमी पर चतुर्ग्रहीय योग बन रहा है। मकर राशि बुध, गुरु, शुक्र व शनि एक साथ संचरण करेंगे। रेवती नक्षत्र, शुभ योग स्नान पर्व का महत्व बढ़ा रहे हैं। वसंत पंचमी ज्ञान-वैराग्य की देवी सरस्वती का प्राकट्य उत्सव भी है। यही कारण है कि सनातन धर्मावलंबी सुबह से मां सरस्वती की स्तुति में लीन हैं। माघ मेला क्षेत्र में संतों ने स्नान के बाद मां सरस्वती का पूजन करने के बाद जल ग्रहण किया। मेला क्षेत्र में यज्ञोपवीत, नामकरण का संस्कार भी कराया जा रहा है।
माघ मेला के चौथे स्नान पर्व वसंत पंचमी के लिए मेला प्रशासन ने रात तक तैयारी पूरी कर ली थी। इस पर्व के लिए भी मौनी अमावस्या की तरह ही 8000 फीट का स्नान घाट तैयार किया गया है। इस बीच गंगा का पानी स्थिर रहा तो घाट सही सलामत रहे। संगम और गंगा के दोनों तरफ बने घाटों पर सुबह से स्नान शुरू हो गया। स्नान के लिए रात से ही लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। सूर्य उदय होने के साथ भीड़ कुछ बढ़ी और संगम तट स्नानार्थियों से भर गया।