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बिहार: अभी विकास से कोसो दूर अभिलेखों में भी दर्ज नही हो पाया मुजफ्फरनगर का हाजीपुर गांव।

बिहार: अभी विकास से कोसो दूर अभिलेखों में भी दर्ज नही हो पाया मुजफ्फरनगर का हाजीपुर गांव।


बिहार। देश में भले ही हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हों, लेकिन बहुत सारे गांव अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पक्के मकान नहीं होने के कारण लोग झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। वहीं ऐसा ही एक गांव मुजफ्फरनगर हाजीपुर का है, जिसमें विकास तो कोसो दूर है, गांव का नाम सरकारी राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज नहीं हो पाया है। गांव में शौचालय, आवास, हैंडपंप, रास्ते, पेंशन आदि सरकारी योजना लोगों के लिए सपना है।

वहीं सोलानी नदी के खादर में वर्ष 1990 में आई बाढ़ में हाजीपुर गांव बह गया था। नगर पंचायत भोकरहेडी के तत्कालीन चेयरमैन मदनपाल सिंह ने नदी किनारे खोले में नगर पंचायत की भूमि में ग्रामीणों को प्लाट आवंटित किए थे। ग्रामीण झोपड़ी बनाकर वहां रहने लगे और भोकरहेडी के बेहडा पट्टी मोहल्ले में उनकी वोट बनवा दी। वक्त बीतता चला गया, लेकिन 31 साल बीतने पर भी गांव में कोई सरकारी योजना नही पहुंची। 

वहीं दूसरी तरफ़ सरकारी सुविधा के नाम पर गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है। गांव के समय सिंह, रामपाल, श्रीपाल, बालमुकंद, सोमपाल, नीलम, राजकली, जगबीरी, बबीता, रवि, संजीव, शंकर आदि का कहना है कि गांव में शौचालय, आवास, हैंडपंप, रास्ते, पेंशन आदि विकास तो दूर की बात गांव का नाम सरकारी अभिलेखों में भी दर्ज नहीं हुआ। 

वहीं नगर पंचायत भोकरहेडी सीमा से बाहर बताते हुए कोई विकास कार्य नही करा सकती और गांव किसी क्षेत्र व ग्राम पंचायत में शामिल नही है। करीब 1355 की जनसंख्या वाले गांव में 710 मतदाता है। गांव के अधिकांश लोग झोपड़ी में रहते है और खेती बाडी मजदूरी करते है। प्रत्येक चुनाव के दौरान नेता गांव में वोट मांगने आते है और वादे करने के बाद लौटकर नही आते है। हाजीपुर गांव भोकरहेडी नगर पंचायत की सीमा से बाहर है, जिसके चलते हम गांव में रास्ते, आवास, शौचालय आदि विकास कार्य नहीं करा सकते हैं।