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हरियाणा: विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन सीएम मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पूर्व सीएम हुड्डा से मांगी व्हाट्सएप चैट की जानकारी।

हरियाणा: विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन सीएम मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पूर्व सीएम हुड्डा से मांगी व्हाट्सएप चैट की जानकारी।


हरियाणा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन बुधवार को कांग्रेस विधायकों खासकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समक्ष उस समय अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपनी सीट से उठे और स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता की ओर मुड़ते हुए बोले कि स्पीकर महोदय, सरकार को वह व्हाट्सएप चैट उपलब्ध कराई जाए, जो दो दिन पहले हुड्डा साहब ने विधानसभा में पढ़कर सुनाई थी। सरकार ने इस चैट की तह में जाकर गहराई और गंभीरता के साथ जांच कराने का निर्णय लिया है।

वहीं स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने जब सदन में बैठे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से चैट की कापी मांगी तो हुड्डा ने देने से साफ इन्कार कर दिया। हुड्डा ने कहा कि मैंने सदन में यह नहीं कहा था कि इस चैट में सच्चाई है। मैंने तो सरकार की जानकारी सब कुछ स्थिति ला दी थी और सरकार को व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराते हुए यह अनुरोध किया था कि पूरे मामले की जांच करा ली जाए कि यह सच है या झूठ है। हुड्डा ने कहा कि वह चैट की कापी नहीं देंगे। सरकार को यदि जांच करानी है तो वह अपने स्तर पर जांच कराने की पहल करे।

वहीं दूसरी तरफ़ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के इस रुख पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल विजयी मुस्कान के साथ मुस्कुराए। उन्होंने तपाक से एक शेर पढ़ा, कांच पर पारा चढ़ा दिया जाए तो दर्पण बन जाता है, वही दर्पण दिखा दिया जाए तो पारा चढ़ जाता है। मनोहर लाल ने विभिन्न मसलों पर चर्चा के दौरान एक के बाद एक चार शेर पढ़े। हालांकि शेर का जवाब शेर के जरिये हुड्डा ने नहीं दिया, लेकिन आखिर तक वह भी मुख्यमंत्री से उलझे रहे और जवाब मांगते रहे।

वहीं दूसरी तरफ़ हरियाणा लोक सेवा आयोग में भर्तियों के नाम पर घोटाले का मामला विधानसभा में खूब गूंजा। इस मामले में सरकार एचसीएस अनिल नागर को बर्खास्त करने के साथ ही विपक्ष द्वारा लाए गए काम रोको प्रस्ताव पर विस्तृत जवाब दे चुकी है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने सदन में एक व्हाट्सएप चैट का जिक्र करते हुए उसे पढ़कर सुनाया था, जिसमें नौकरियों के लिए सिफारिश तथा लेनदेन की बात का जिक्र बताया गया था। 

वहीं इस चैट को लेकर सरकार की परेशानी बढ़ गई थी, लेकिन तब भी मुख्यमंत्री ने पूरे तथ्यों के साथ जवाब दिया था।मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को कहा कि सरकार हर तरह की जांच कराने के लिए तैयार है। इसलिए स्पीकर साहब, हुड्डा साहब ने जिस व्हाट्सएप चैट का उल्लेख किया था, उसकी कापी हमें दिलाएं। सरकार इसकी जांच कराएगी। इस पर स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने हुड्डा से चैट की कापी मांगी। 

वहीं दूसरी तरफ़ सरकार व्हाट्सएप पर हुई बातचीत की तह में जाएगी और साथ ही यह पता लगाएगी कि किस नंबर से किस नंबर पर किसकी बातचीत हुई है अथवा यह चैट राजनीतिक शगूफा है। हुड्डा ने कहा कि मेरे ऊपर चैट की कापी देने का दबाव नहीं डाला जा सकता। सरकार से कुछ भी छिपा नहीं है। मैं चैट की कापी नहीं दे सकता। कुछ चीजें गोपनीय होती हैं। सरकार को यदि अपनी ईमानदारी पर इतना ही भरोसा है तो हमने नंबर उपलब्ध करा दिया है, वह खुद ही जांच कराए।

वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हुड्डा पर व्यंग्य करते हुए शेर पढ़ा, तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं है, कमाल ये है कि फिर भी आपको यकीन नहीं है। इस दौरान चर्चा आगे बढ़ी तो क्रीमीलेयर की राशि घटा देने के मुद्दे पर मनोहर लाल और हुड्डा भिड़ पड़े। हुड्डा ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था से छेड़छाड़ उचित नहीं है। केंद्र सरकार ने क्रीमीलेयर की राशि आठ लाख रुपये कर रखी है, लेकिन हरियाणा सरकार ने इसे घटाकर छह लाख कर दिया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट भी इस व्यवस्था को खारिज कर चुकी है।

बता दें कि वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने छह लाख के क्रीमीलेयर को खारिज नहीं किया, बल्कि इसे तीन-तीन लाख के दो वर्गों में बांटने की व्यवस्था को खारिज किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओबीसी के वास्तविक पात्रों को क्रीमीलेयर का लाभ मिले, इसलिए छह लाख रुपये तक आय होने पर लाभ की व्यवस्था की गई है। यदि कोई कर्मचारी वेतन लेता है तो क्या उसे उसकी आय नहीं माना जाना चाहिए। 

वहीं बात को आगे बढ़ाते हुए मनोहर लाल ने कहा कि लोहे का स्वाद लोहार से मत पूछो, घोड़े से पूछो जिसके मुंह में लगाम है। इस दौरान विपक्ष की टोकाटाकी चलती रही, जिस पर मनोहर लाल ने एक और शेर पढ़ा, सलीका अदब का इतना तो बरकरार रहे, रंजिशें अपनी जगह पर हों पर दुआ सलाम तो बरकरार रहे।