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झारखंड : जमशेदपुर में 108 साल पहले इस शख्स के एक पत्र ने रखी थी देश में टाटा स्टील औद्योगिक क्रांति की नींव।
जमशेदपुर। टाटा स्टील की स्थापना के साथ ही देश में औद्योगिक क्रांति की नींव रखी गई थी। टाटा स्टील देश की पहली स्टील उत्पादन कंपनी है जिसकी स्थापना वर्ष 1907 में हुई। लेकिन इस कंपनी की स्थापना के पीछे एक लंबी कहानी है। स्थापना के पहले भू-वैज्ञानिक पीएन बोस ने सर दोराबजी टाटा को 24 फरवरी 1904 को एक पत्र भेजा था। 24 फरवरी को उस भेजे गए पत्र के 108 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस पत्र के कारण ही देश में औद्योगिक क्रांति की शुरूआत हुई थी।
वहीं टाटा स्टील चाहती थी कि देश में स्टील प्लांट की स्थापना हो। लेकिन इसकी स्थापना से पहले जेएन टाटा को पर्याप्त व अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चा माल जैसे आयरन ओर व कोयले की आवश्यकता थी। इसकी खोज के लिए जेएन टाटा ने इंगलैंड की विभिन्न पत्रिकाओं में विज्ञापन दिए। साथ ही घोषणा की कि जो भी वरोरा कोक साथ आयरन ओर को गलाने की विधि विकसित करेगा, उन्हें इनाम दिया जाएगा।
वहीं हालांकि इसके कुछ उत्साहनजक परिणाम नहीं मिले। जबकि जेएन टाटा को प्लांट शुरू करने से पहले खनिज के साथ-साथ तकनीक की भी आवश्यकता थी। हालांकि प्रारंभिक जांच में मध्य प्रांत के चंदा जिले के लोहरा में लौह अयस्क व कोयला के पर्याप्त भंडार होने की सूचना मिली थी ताकि स्टील कंपनी का निर्माण किया जा सके। लेकिन दुर्भाग्यवश कोयले की गुणवत्ता अपर्याप्त रही।
वहीं दूसरी तरफ़ जेएन टाटा के बेटे सर दोराबजी टाटा स्टील प्लांट लगाने के लिए आयरन ओर व कोयले का भंडार पता लगाने के लिए विशेषज्ञों से मिल रहे थे। इसी क्रम में वे नागपुर सचिवालय में आयुक्त से मिलने पहुंचे। लेकिन आयुक्त कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं थे तो सर दोराबजी टाटा सचिवालय के रोड़ के दूसरी तरफ एक संग्रहालय चले गए।
वहीं जहां एक रंगीन भूवैज्ञानिक मानचित्र से वे आकर्षित हुए। इस मानचित्र में दर्शाया गया था कि दल्ली-राजहरा में लौह अयस्क का भंडार है और उसकी गुणवत्ता भी अच्छी है लेकिन कोयले व पानी वहां उपलब्ध नहीं था। ऐसे में सर दोराबजी टाटा को दल्ली-राजहरा को भी छोड़ना पड़ा।
वहीं दूसरी तरफ़ 24 फरवरी 1904 को भारतीय भूवैज्ञानिक पीएन उर्फ प्रमथ नाथ बोस ने सर दोराबजी टाटा को एक पत्र भेजा। जिसमें उन्होंने मयूरभंज राज्य में अच्छी गुणवत्ता वाले लौह अयस्क व झरिया में कोयले की उपलब्धता की जानकारी दी। साथ ही छोटानगापुर के सिंहभूम में दो नदियों के संगम, यानि स्वर्णरेखा व खरकई नदी के बारे में बताया जहां से पानी की उपलब्धता संभव थी। इस पत्र के मिलने के बाद सर दोराबजी टाटा ने साकची नाम एक छोटे से गांव में स्टील प्लांट की स्थापना की जिसे अब जमशेदपुर के नाम से जाना जाता है।