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यूपी : कानपुर में पीयूष जैन मामले में 71 सवालों से खुल गया 196 करोड़ कैश का ओपन हुआ राज़।

यूपी : कानपुर में पीयूष जैन मामले में 71 सवालों से खुल गया 196 करोड़ कैश का ओपन हुआ राज़।

                                       𝑹𝒆𝒏𝒖 𝑻𝒊𝒘𝒂𝒓𝒊 𝑹𝒆𝒑𝒐𝒕𝒆𝒓 

कानपुर। जीएसटी इंटेलीजेंस महानिदेशालय डीजीजीआइ अहमदाबाद ने इत्र कारोबारी पीयूष जैन के करोड़ों रुपये का काला चिट्ठा 71 सवालों में खोलकर रख दिया। जानकर हैरानी होगी कि जिस समय पीयूष जैन के घर से करोड़ों रुपये की नकदी निकली, वह दस्तावेजों में महज पांच हजार रुपये नकद का मालिक था। 

वही उसकी फर्म ओडोकैम के खाते में 29,046 रुपये थे। परिवार के सभी सदस्यों के पास मिलाकर 2,40,552 रुपये की नकदी थी। छापे में बरामद रुपये, जीएसटी की चोरी, आयकर में कम आय दिखाने जैसे सभी साक्ष्य मंगलवार को कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में शामिल किए गए। डीजीजीआइ अहमदाबाद की टीम ने इत्र कारोबारी के आनंदपुरी स्थित घर में एक दिसंबर, 2021 को छापा मारा था। 

वही इसके बाद कन्नौज स्थित तीन फर्म ओडोकैम, ओडोसिंथ और फ्लोरा में छापा मारकर दोनों जगहों से 196 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे। इस मामले में अधिकारियों ने पीयूष जैन से 71 सवाल पूछे थे। इसमें से कुछ सवाल और पीयूष जैन के जवाब ऐसे थे।

प्रश्न :177 करोड़ रुपये किसके हैं ?

उत्तर : यह मेरा पैसा है। 

प्रश्न : कितने सालों में यह पैसा कमाया?

उत्तर : तीन से चार सालों में जमा किया।

प्रश्न : किस तरह से पैसा जमा किया ?

उत्तर : तीनों फर्म से बिना इनवाइस उत्पाद बेचकर जमा किया। 

प्रश्न : 2020-21 में कितना टैक्स जमा किया?

उत्तर : 22,29,580 की आय हुई, जिसमें 5,04,328 रुपये बतौर कर जमा किया

प्रश्न : 2020-21 में परिवार के सदस्यों ने कितना टैक्स दिया?

उत्तर : परिवार के पांच लोगों की आय 2,10,63,545 रुपये थी, जिसमें 58,81,860 रुपये कर के रूप में जमा किया ।

प्रश्न : कैश इन हैंड कितने रुपये पास में हैं?

उत्तर : पांच हजार रुपये।

प्रश्न : फर्म के नाम पर नकद कितना है?

उत्तर : 29,046 रुपये। 

प्रश्न : परिवार के पास नकद धनराशि कितनी है?

उत्तर : 2,40,552 रुपये। 

प्रश्न : बरामद रुपये जीएसटी चोरी कर जमा किए गए हैं?

उत्तर : हां, जीएसटी का भुगतान नहीं किया। अनुमति दें तो अब जमा कर दूंगा।

वहीं पीयूष जैन ने बरामद रुपयों में 52 करोड़ रुपये बतौर टैक्स जमा करने का दावा किया था, लेकिन बैंक के पत्रों के मुताबिक पैसा जमा नहीं हुआ। एसबीआइ अधिकारियों का पत्र भी इस संबंध में डीजीजीआइ ने कोर्ट में दाखिल किया था। डीजीजीआइ के विशेष लोक अभियोजक अंबरीश टंडन ने बताया कि बरामद रुपयों पर कितना टैक्स जमा होना है, इसका आंकलन अभी तक नहीं किया गया है। ऐसे में 52 करोड़ रुपये जमा होने की बात निराधार और हास्यास्पद है।