Headlines
Loading...
यूपी : वाराणसी के बभनियांव में 3500 वर्ष पुरानी सभ्यता के प्रमाण, वहीं चार चरणों में काफी मजबूत बना है प्रदक्षिणा पथ।

यूपी : वाराणसी के बभनियांव में 3500 वर्ष पुरानी सभ्यता के प्रमाण, वहीं चार चरणों में काफी मजबूत बना है प्रदक्षिणा पथ।


वाराणसी। जनपद के बभनियांव में चल रही पुरातात्विक खोदाई में मिले लाल और काली मिट्टी के बर्तन ताम्रपाषाण कालीन हैं। ये लगभग 3500 वर्ष पुराने हैं। इससे पता चलता है कि यह प्राचीन काशी के सबसे प्राचीन स्थलों में से है जो हड़प्पा कालीन सभ्यता के समकक्ष नगरीय सभ्यता रही होगी। 

वहीं उसके बगल में चल रही खोदाई में मिला मंदिर और शिवलिंग दो हजार वर्ष पुराना यानी कुषाणकालीन है। ये साबित करते हैं कि इसके नीचे और भी पुरनी सभ्यता दबी हो सकती है। इस बात का अनुमान हरियाणा स्थित राखीगढ़ी की खोदाई करने वाले देश के प्रख्यात पुरातत्वविद प्रो. वसंत शिंदे ने लगाया है। वह इन दिनों वाराणसी के दौरे पर हैं और मंगलवार को बभनियांव उत्खनन स्थल पर पहुंचे थे।

वहीं उनके साथ पहुंचे बीएचयू जंतु विज्ञान विभाग के डीएनए विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि यहां मिले पशुओं की हड्डियों का डीएनए अध्ययन किया जाएगा। बीएचयू प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के प्रो. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार को मंदिर के प्रदक्षिणा पथ की खोदाई की गई। पता चला कि चार चरणों में निर्मित यह प्रदक्षिणा पथ काफी मजबूत बनाया गया है। 

वहीं इसमें सबसे नीचे ईंटों के छोटे टुकड़े, उसके ऊपर सुर्खी की लेयर, फिर उसके ऊपर ईंटों के टुकड़े और फिर एक लेयर ईंट की है। इतने मजबूत प्रदक्षिणा पथ से पता चलता है कि यह मंदिर काफी प्रतिष्ठित और लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र रहा होगा, यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती रही होगी, जिसके दृष्टिगत इसे इतना मजबूत बनाया गया होगा। 

वहीं बुधवार को प्रदक्षिणा पथ के नीचे खोदाई होगी। विभागाध्यक्ष प्रो. ओंकारनाथ सिंह और प्रो. अशोक कुमार सिंह के निर्देशन में चल रही खोदाई में प्रो. अनिल कुमार दुबे, डा. उमेश कुमार सिंह, डा. सचिन तिवारी, आर्य महिला पीजी कालेज के प्रवक्ता डा. रविशंकर आदि थे।