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यूपी : वाराणसी समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों में पांच वर्षों में बगैर किसी कमीशन व भागदौड़ के जरूरतमंदों को मिला प्रधानमंत्री आवास योजना।
वाराणसी। देश के सभी लोगों का अपना घर का सपना पूरा करने के लिए सरकार ने जून 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की। इस योजना का लक्ष्य था कि आर्थिक रूप से कमजोर उन लोगों को अपना घर मुहैया कराना जिनके लिए यह एक असंभव सपना था।
वहीं एक देश जहां कभी एक रुपये में से दस पैसा ही नीचे जरूरतमंद तक पहुंचा करता था, वहां बिना किसी भेदभाव और पूरी पारदर्शिता के साथ इतनी बड़ी योजना की सफलता बदलते भारत की कहानी बनकर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में चुनाव चल रहे हैैं। चुनाव की गहमागहमी के बीच पीएम आवास योजना की चर्चा मतदाता की जुबान पर है।
वहीं जरूरतमंदों को आवास दिए जाने की योजना कोई नई नहीं है। पूर्व की सरकारों ने भी अलग-अलग नामों से आवास योजना का लाभ दिया है। शहर से लेकर गांव तक गरीब-गुरबों को उपलब्ध भी कराया, लेकिन उन दिनों आवास लेने से लेकर बनवाने तक में गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और भेदभाव का जो बोलबाला रहा है, वह अब बिल्कुल नहीं है।
वहीं देवचंदपुर चौकियां की पूर्व ग्राम प्रधान अश्विनी तिवारी कहती हैं कि पूर्व की कांग्रेस सरकार इंदिरा आवास योजना लाई थी। दो किस्तों में 70 हजार रुपये मिलते थे। उसमें भी कमीशनखोरी से लेकर भाग-दौड़ में चप्पल घिस जाती थी। आज प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी व ग्रामीण नाम से चलाई जा रही योजना में ग्रामीण में दो किस्तों में एक लाख बीस हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
वहीं इसमें एक कमरा, बरामदा व रसोई घर बना। सबसे बड़ी बात यह कि इसके लिए किसी जान-पहचान की जरूरत नहीं, किसी को कमीशन नहीं देना पड़ा। पात्रों तक अधिकारी खुद पहुंचे और उन्हें योजना का लाभ दिया। वंचितों को मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत छत मुहैया कराई गई। पूर्व की सरकारों ने भी लोहिया व महामाया आवास का लाभ दिया, लेकिन पात्र कैसे लाभान्वित हुए, कोई नहीं जानता।
बता दें कि जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर विधानसभा के नगर क्षेत्र पकड़ी प्रथम वार्ड की इतवारी देवी व नन्हे लाल कहते हैं कि मेहनत मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं। रहने को घर नहीं था। छप्पर में तीन बेटियां व दो बेटों को लेकर गुजर बसर कर रहे थे। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के लिए अधिकारी घर आए और कहा कि आपको आवास मिलेगा।
वहीं एक बार तो विश्वास ही नहीं हुआ। पिछली सरकारों में भी आवास के लिए कोशिश की थी लेकिन हुआ कुछ नहीं था। लेकिन इस बार तो कुछ ही दिनों में बैैंक में खाता खोलवाकर पैसे भेज दिए गए। अब तो आवास बन गया है। परिवार पक्के मकान में रहता है। पहले तेज हवा और बरसात होने पर डर लगता था। अब तो साहब, जीवन ही बदल गया है।
वहीं दूसरी ओर जौनपुर के बदलापुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत ऊदपुर घाटमपुर के रामआसरे गौतम की पत्नी शकुंतला कहती हैं कि मजदूरी करके परिवार के चार सदस्यों का जीविकोपार्जन करते हैं। उम्मीद नहीं थी कि कभी हम और हमारे बच्चे पक्के मकान में रहेंगे। लेकिन भाजपा सरकार ने दो वर्ष पहले घर बनवाने के लिए एक लाख बीस हजार रुपये खाते में दे दिया। अब तो प्रधानमंत्री आवास ने मेरे परिवार की दिशा व दशा ही बदल दी है।
वहीं ई त जोगीजी क 'धनबाद बा कि आज हमहूं पक्का मकान वाली हो गईली, अऊर हमार परिवार सुरक्षित बा। यह कहना है कि वाराणसी के अजगरा विधानसभा क्षेत्र के घमहापुर गांव निवासी मंटरू गोड़ की पत्नी प्रमिला का। वह पीएम आवास योजना से काफी खुश हैं। कहती हैं कि दू बच्चन क परिवार बा। एक के दूनों आंखी नाहीं दिखत। मंड़ई में रहत डर लगत रहल कि कहीं ए के कउनो जानवर न काट ले। आज त सब ठीक होई गयल बा। चाहे जाड़ा हो या गरमी, कऊनो दिक्कत नाहीं बा।
वहीं सपने में भी नहीं सोचा था कि अपना भी घर होगा। इधर-उधर टहलते थे। झोपड़ी डाल कर जीवन गुजर बसर करते थे। सरकार की कृपा से आज अपना भी पक्का घर है। शासन की अच्छी पहल पर आवास का सपना पूरा हुआ। अब बारिश की कौन कहे किसी भी मौसम में कोई परेशानी नहीं होती है। 2021 में आवास की धनराशि खाते में आ गई। मकान बना तो समस्याएं दूर हो गईं।
वहीं वर्ष 2020-21 में मिला प्रधानमंत्री आवास मददगार साबित हो रहा है। घास-फूस की झोपड़ी से छुटकारा मिला और पक्के मकान में खुशहाल जिंदगी बीत रही है। झोपड़ी में बारिश के दिनों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण काफी मददगार साबित हो रही है।
वहीं पक्की छत का सपना वर्षों से सजोएं हुए थी। 2021 में प्रधानमंत्री आवास योजना से उसका सपना पूरा हुआ। यकीन ही नहीं हो रहा था कि झोपड़ी से निकलकर पक्की छत के नीचे गुजर बसर कर रही हूं। सरकार से मिले ढाई लाख रुपये से अब अपना पक्का घर हो गया है।
वहीं पिताजी ने किसी तरह से छत तो बना ली थी, लेकिन बारिश में पानी टपकता था। पूरी रात नींद नहीं आती थी। इधर-उधर चारपाई खिसकाते रहते थे, लेकिन प्रधानमंत्री आवास बनने से इस समस्या से छुटकारा मिल गया। परिवार के लोग भी खुशी से रह रहे हैंं।
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