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बिहार : दरभंगा में फर्जी आइडी पर संस्कृत विश्वविद्यालय में कर्मचारियों का भुगतान में हों रहा बड़ा कारनामा।
बिहार। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी तरीके से पे-आइडी बनाकर निर्धारित कर्मचारियों से अधिक को भुगतान किया जा रहा है। इसका खुलासा संस्कृत विश्वविद्यालय के बजट समीक्षा के दौरान हुआ है। इसमें पता चला है कि विश्वविद्यालय स्तर से बजटीय प्रावधान अंतर्गत निर्देशित संख्या में कार्यरत कर्मचारियों से अधिक कर्मियों का पे आईडी बनाकर भुगतान किया जा रहा है।
वहीं इतना ही नहीं विश्वविद्यालय द्वारा नियमित कार्यरत कर्मचारियों की राशि से समानुपातिक रूप से कटौती कर अन्य कर्मचारियों का भुगतान किया जा रहा है। तीन मार्च 2022 को शिक्षा विभाग बिहार सरकार के उप-सचिव अरशद फिरोज ने महालेखाकार पटना को पत्र जारी कर इसकी सूचना दी है। पत्र में बताया है कि संस्कृत विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के भुगतान में अनियमितता की जा रही है। अनुरोध करते हुए कहा कि उक्त मामले की महालेखाकार कार्यालय के स्तर से भुगतान संबंधित अनियमितता का आडिट कराया जाए।
वहीं उप-सचिव अरशद फिरोज ने कुलपति प्रो. शशिनाथ झा को जारी अपने दूसरे पत्र में असंबद्ध घाटानुदानित कालेजों के कर्मचारियों को गलत ढंग से भुगतान मामले में जवाब मांगा है। बताते हैं कि विवि बजट की समीक्षा और वर्तमान कुलसचिव के द्वारा विभाग में किए जा रहे पत्राचार की समीक्षा के बाद विश्वविद्यालय में कई वित्तीय अनियमितता एवं प्रशासनिक अनियमितता उजागर हुई है।
वहीं विवि प्रशासन के द्वारा असंबद्ध घाटानुदानित कालेजों के कर्मचारियों को वेतन अनुदान दिए जाने का प्रयास किया गया है। विवि के अधिकारियों के साथ साठ-गांठ कर गलत ढ़ंग से पे-आईडी बनाकर कर्मचारियों को भुगतान किया जा रहा है। बिहार सरकार द्वारा नियमित कार्यरत कर्मचारियों की राशि से समानुपातिक रूप से कटौती कर अन्य कर्मचारियों को भुगतान किया जा रहा है।
वहीं अनियमितताओं को लेकर सात मार्च तक जांच रिपोर्ट समर्पित करने को कहा गया है। पत्र में कुलपति से कालेजवार विधिवत रूप से नियुक्त कितने शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का भुगतान किया जा रहा है। कार्यरत कर्मचारियों के अतिरिक्त जिन कर्मचारियों को भुगतान किया जा रहा है।
वहीं उसकी सूची उपलब्ध कराने, विवि के संबद्ध घाटानुदानित शास्त्री स्तरीय कालेजों के संबद्धता की अद्यतन स्थिति की जांच सहित कई अन्य बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। इतना ही नहीं उपरोक्त ङ्क्षबदुओं पर सही-सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में विभाग द्वारा संबंधित कालेजों का अनुदान बंद कराने की बाध्यता भी जताई गई है।