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यूपी : वाराणसी में नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि अपने चुनाव के लिए नहीं बनाया काशी विश्वनाथ धाम 'मैं अब यूपी का हो गया हूं। .
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ धाम अपने चुनाव के लिए मैंने नहीं बनाया। ऐसी पहल से देश का आत्मविश्वास बढ़ता है। ऐसा ही एक प्रतीक अब देश में 'स्टैच्यू आफ यूनिटी' है। यह सब देश में पहले हो जाना चाहिए था। वह शनिवार को 'रमन निवास' में काशी के प्रबुद्ध लोगों से बातचीत कर रहे थे।
वहीं उन्होंने कहा कि काशी स्वयं ऊर्जा का भंडार है, लेकिन यथास्थिति में रहते हुए परिवर्तन की आवश्यकता महसूस नहीं होती। जब बदलाव शुरू होता है तब पुराने और नए परिवर्तन का भेद दिखता है। बोले, यूपी को 'कंटिन्यूटी' (निरंतरता) भी चाहिए और 'स्टैबिलिटी' (स्थायित्व) भी। मैं अब यूपी का हो गया हूं।
वहीं हिंदुस्तान की इकोनामी को लीड करने की ताकत इस प्रदेश में है और दस-पंद्रह साल में यह देश अर्थव्यवस्था की ड्राइविंग फोर्स हो जाएगा। वहीं मोदी ने बनारस में 2014 के अपने पहले चुनाव का स्मरण कराया और कहा कि उस समय सरकार से सभा के लिए इजाजत नहीं मिली। लोगों से संवाद नहीं हो सका, फिर भी यहां के लोगों से आत्मिक जुड़ाव महसूस हुआ। जब जीत कर आया तो सबसे पहले 'गंगा आरती' की और निश्चय किया जिन लोगों ने उनको चुना, बिना जान-पहचान और संवाद किए चुना।
वहीं उनके लिए कुछ करेंगे। काशी के मन में चल रही बात मैं समझ लेता हूं। यहां के बदलाव में धन का रोल कम है। कोई यह भ्रम न पाले कि यहां का सांसद हूं तो खजाना खाली कर रहा हूं। यहां की महान विरासत का संबंध विकास से है। प्रधानमंत्री के यह बोलते ही लोगों ने 'हर हर महादेव' का जयघोष किया।
वहीं प्रधानमंत्री ने बताया कि राजनीतिक स्थिरता देश के विकास की अनिवार्य शर्त है। 2014 से पहले 30 साल तक स्थिर सरकार नहीं रही। मिलीजुली सरकार बनी, जिसमें बंदरबांट हुआ। रेल मंत्रालय तक में कोई बड़े निर्णय नहीं हो सके। आज जो कुछ मैं कर पा रहा हूं, उसमें देशवासियों का ही योगदान है। विकास के लिए निरंतरता वाली स्थाई सरकार आवश्यक है।
वहीं वैसे ही जैसे ड्राइवर बूढ़ा भी हो जाए तो मन करता है कि यही बना रहे। बोले-उत्तर प्रदेश के लिए भी ऐसा ही मिथक है कि यहां तो पांच साल के बाद सरकार बदलती है। इससे किसी को गर्व नहीं होना चाहिए। निरंतरता वाली सरकार से आप हिसाब मांग सकते हैं। अस्थिर सरकार या प्रशासन से जिम्मेदारी तय नहीं हो सकती है। बताया कि गुजरात में ट्रांसफर-पोस्टिंग का सिलसिला उन्होंने रोक दिया था। विधायक नाराज भी हुए, लेकिन बात समझी।
वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू से भी ज्यादा समय तक वे 'हेड आफ द गवर्मेंट' रहे, इस कारण सबसे लंबे समय तक काम करने का मौका मिला है। मीडिया में यह बात कम आती है, लेकिन मेरे परिवार का कोई सदस्य राजनीति में नहीं है। मेरी अपनी कोई जाति-बिरादरी नहीं है। बीएचयू के कुलपति सुधीर जैन का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने गुजरात में बदलाव देखा है कि वहां कैसे दंगा थम गया। 22 साल में एक भी दंगा नहीं हुआ।
वहीं मोदी ने कहा, मैं जानकारी खुद लेने की कोशिश करता हूं। शुक्रवार की रात मैं कैंट स्टेशन गया था और देखा कि पांच फुट की जगह में काशी के मूल उत्पाद बिकने को रखे थे। बताया गया कि प्रतिदिन दस हजार की बिक्री हो जाती है। काशी का रेलवे स्टेशन भी अर्थव्यवस्था को ताकत दे सकता है यह मोदी के दिमाग में आया। काशी ने मुझे जन गण मन सिखाया।
वहीं स्टेशन पर जाकर मुझे 'वंदे भारत ट्रेन का अनुभव मिला। पता चला कि इसमें गरीब लोग भी जाते हैं। प्रधानमंत्री ने एक कहानी सुनाई। तब वह राजनीति में नहीं थे और बात चालीस साल पुरानी है। आदिवासी बस्ती छोटा उदयपुर के पास वह सड़क पर थे। वहां एक आदिवासी युवा जोड़ा आया। उसे जहां जाना था, वहां की बस आ गई पर उसमें वह नहीं चढ़ा।
वहीं उसी प्रकार की दूसरी बस भी आई पर उससे भी वह नहीं गया। जब पूछा गया कि क्यों बस छोड़ रहे हो, तो उसने बताया कि वह लाल बाडी वाली बस में जाएगा, जिसका किराया तो ज्यादा है पर वह तेज दौड़ती है। चालीस साल पहले जंगल में रहने वाला आदिवासी बच्चा भी स्पीड चाहता था।
वहीं अपनी जन्मभूमि वडनगर की तुलना काशी जैसे गुण से की। बताया कि यहां जैसी ही अजस्र जीवनधारा वहां है। यह काशी का महात्म्य ही है कि अमेरिका में शिक्षकों का सम्मान 'गुरु' शब्द से है। वहां भी एक गली है, जिसमें विद्वतजन रहते हैं और उसका नाम 'काशी' है। बोस्टन यूनिवर्सिटी की यात्रा में इन दोनों चीजों को मैंने देखा-समझा।
वहीं पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र व पद्मश्री हरिहर कृपालु त्रिपाठी, समाजसेवी रमा रमन ने उनका अभिनंदन किया। प्रदेश सह मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री का स्वागत व कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, प्रोफेसर चंद्रमौलि उपाध्याय व अन्य उपस्थित थे।