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यूपी : जौनपुर के नौ सीटों पर कई राजनीतिक दिग्गजों की टक्कर में वोटरों को करना है अब फैसला।
जौनपुर। विधानसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण में पूर्वांचल में आजमगढ़ के बाद सर्वाधिक जौनपुर की नौ सीटों पर सभी की नजर है। यहां से प्रदेश सरकार के एक मंत्री, दो पूर्व मंत्री व तीन पूर्व सांसद चुनावी मैदान में आमने सामने है।
वहीं जौनपुर की सबसे चर्चित सीट में जौनपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से योगी सरकार के आवास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां उनकी टक्कर सपा प्रत्याशी पूर्व विधायक अरशद खान से नजर आ रही है, हालांकि पार्टी के परंपरागत मतों के भरोसे बसपा के सलीम खान व कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार गांधी परिवार के करीबी पूर्व विधायक नदीम जावेद मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने को पूरी ताकत झोंक चुके हैं। चार दशक से कोई प्रत्याशी यहां दुबारा चुनाव नहीं जीत सका है।
वहीं बीते वर्ष 2012 में नवसृजित इस विधानसभा सीट में अब तक हुए दो आम चुनाव व एक उपचुनाव में हर बार सपा ने बाजी मारी है। जिले की यह इकलौती विधानसभा सीट है जहां अब तक हुए चुनावों में मुख्य मुकाबला निर्दल प्रत्याशी धनंजय सिंह से रहा है। यहां से दो बार विधायक रहे कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव के निधन के बाद उपचुनाव में विधायक चुने गए उनके पुत्र लकी यादव एक बार फिर सपा प्रत्याशी हैं।
वहीं इस बार भी उनका मुकाबला जद यू प्रत्याशी पूर्व सांसद धनंजय सिंह से तय माना जा रहा है। करहल के बाद प्रदेश की यह इकलौती सीट रही जहां सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने आकर प्रचार किया है। यहां भाजपा से पूर्व सांसद डाक्टर केपी सिंह मैदान में हैं।
वहीं दूसरी तरफ़ पूर्वांचल की दूसरी बड़ी गल्ला मंडी वाले शाहगंज विधानसभा में पिछले चार चुनावों से लगातार सपा का कब्जा है। सपा से विधायक पूर्व मंत्री शैलेंद्र यादव ललई से इस बार भाजपा के सहयोगी निषाद पार्टी के उम्मीदवार पूर्व प्रमुख रमेश सिंह की सीधी टक्कर मानी जा रही है।
वहीं इस सुरक्षित विधानसभा सीट से भाजपा से विधायक दिनेश चौधरी, सपा से पूर्व सांसद तूफानी सरोज व बसपा के डाक्टर लालबहादुर सिद्धार्थ के बीच कांटे के मुकाबले के आसार हैं। यहां भाजपा के समक्ष सीट बचाने तो सपा-बसपा के समक्ष उन्हें बेदखल करने की कठिन चुनौती है।