वाराणसी :: श्रावणमास में वासुकीश्वर महादेव, करकोटकेश्वर के दर्शन का है विशेष महत्व,,,।
काशी में श्रावण मास के दौरान संकठा गली स्थित वासुकीश्वर व जैतपुरा स्थित कर्कोटकेश्वर महादेव के दर्शन का भी विशेष महत्व है। इस बार सावन में अधिकमास पड़ रहा है। इससे सावन का अधिक महत्व है। इस अधिमास में भगवान विष्णु और शिव की संयुक्त हरिहरात्मक उपासना होगी।
काशी विद्वत परिषद के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा ने बताया कि स्कंदपुराण के काशी खंड के अनुसार श्रावण शुक्ल पंचमी को वासुकीश्वर और कर्कोटकेश्वर महादेव की यात्रा का विधान है। सावन के प्रथम को केदारघाट स्थित केदारेश्वर महादेव व कमच्छा स्थित कामाक्षी देवी की यात्रा का भी विशेष महत्व है। उनके मुताबिक कई वर्ष बाद इस बार सावन में 17 जुलाई को सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है।
अधिमास में प्रतिबंध
इस मास में सभी मांगलिक कार्य, महोत्सव का आयोजन, यज्ञ व मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा आदि वर्जित हैं। खास यह है कि अधिमास में किसी कामना से जप करना वर्जित है जबकि निष्काम भाव से जप करने का कई गुना महत्व है।
कब पड़ता है अधिमास
जब किसी चंद्र मास में दो अमावस्या के मध्य सूर्य की संक्रांति नहीं होती तो वह मास अधिकमास कहा जाता है। यह मास भगवान विष्णु को समर्पित है। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार इस माह पुरुषोत्तम व्रत, देवी भागवत के अनुसार मलमास व्रत तथा भगवान को तांबूल व मालपुए का भोग लगाकर दान करने का विधान है।
महत्वपूर्ण तिथि
● 13 जुलाई- श्री कामदा एकादशी
● 15 जुलाई- मास शिवरात्रि
● 17 जुलाई- हरियाली सोमवती अमावस्या
● 21 अगस्त- नागपंचमी
● 23 अगस्त-तुलसी दास जयंती
● 29 अगस्त-मास शिवरात्रि
● 30 अगस्त-श्रावणी उपाकर्म व रक्षाबंधन
अधिकमास की तिथियां
● 18 जुलाई-अधिकमास प्रारंभ
● 29 जुलाई- श्रीपुरुषोत्तम एकादशी ।