प्रयागराज :: संगमनगरी के पिछड़े इलाके का ऐसा सरकारी स्कूल जहां टैबलेट से पढ़ते हैं बच्चे,,,।
प्राइमरी स्कूल के बच्चे : संगमनगरी के 2852 परिषदीय विद्यालयों में से एक विद्यालय ऐसा भी है जहां बच्चे टैबलेट से पढ़ाई करते हैं। खास बात यह है कि यह स्कूल यमुनापार के कोरांव में है, जो जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर है। यह इलाका पठारी होने के साथ ही सबसे पिछड़ा भी माना जाता है। यहां के छापर हरदौन स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 29 अगस्त 2019 को टैबलैब स्थापित किया गया था। यूपी के परिषदीय स्कूलों की यह पहली टैबलैब थी।
टैबलैब की स्थापना स्कूल के विज्ञान शिक्षक सत्य प्रकाश ने की थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बायोइन्फार्मेटिक्स में एमएससी करने वाले सत्य प्रकाश सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) हैदराबाद के शोधार्थी रहे हैं। वह अब स्काईप की मदद से वीडियोकॉल कर यहां के बच्चों को बड़े-बड़े वैज्ञानिकों से रूबरू कराने की तैयारी में हैं ताकि उनसे प्रेरित होकर बच्चे आगे बढ़ सकें।
बच्चों को अनुशासित भी कर रही लैब
टैबलैट से पढ़ने के लिए बच्चो में होड़ लगी रहती है। इस प्रतिस्पर्धा का उपयोग बच्चों को सेल्फ स्टडी और सेल्फ केअर के प्रति प्रेरित करने में किया जाता है। उदाहरण के तौर पर शिक्षक उन्हीं बच्चों को टैबलेट देते हैं, जो साफ-सुथरी यूनिफॉर्म पहनकर आते हैं या जिनका होमवर्क पूरा होता है। कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल में दो ही शिक्षक हैं। ऐसे में जो क्लास खाली रहती है उसके बच्चों को टैबलेट दे दिया जाता है, जिससे उनका समय रचनात्मक गतिविधियों में लग रहता है। बच्चे विज्ञान से संबंधित अवधारणाएं और प्रयोग टैबलेट में देखकर समझते हैं।
अमेरिका-लखनऊ के वैज्ञानिकों ने की मदद
विज्ञान शिक्षक सत्य प्रकाश ने शिकागो विश्वविद्यालय (अमेरिका) में ह्यूमन जेनेटिक्स विभाग की प्रो. मानसा राघवन व बीरबल साहनी पुरा विज्ञान संस्थान लखनऊ के प्राचीन डीएनए वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय से प्रयागराज के अति पिछड़े क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति व इसमें आधुनिक तकनीक के प्रयोग के लिए टैबलैब स्थापित करने की इच्छा जाहिर की थी। इस पर प्रो. मानसा राघवन ने 1.65 लाख रुपये टैबलैब स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी। डॉ. नीरज राय के सानिध्य में टैबलैब की स्थापना हुई।
सरकारी पाठ्यक्रम के आधार पर बनाया टैबलेट
टैबलैब की स्थापना गुड़गांव स्थित कम्पनी ने की है। कम्पनी ने बेसिक शिक्षा परिषद के कक्षा एक से आठ तक की विषयवस्तु पर आधारित हिन्दी माध्यम में 10 टैबलेट बनाया। इसमें उपलब्ध विभिन्न क्षेत्र की 1500 पुस्तकों के जरिए बच्चों के मानसिक स्तर में सुधार की कोशिश की जा रही है।