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ज्ञानवापी सर्वे : तहखाने में घुसी एएसआई की टीम, मंदिरों के प्रतीक चिह्न और मूर्तियां मिलीं, आज भी सर्वे कार्य जारी ,,,।

ज्ञानवापी सर्वे : तहखाने में घुसी एएसआई की टीम, मंदिरों के प्रतीक चिह्न और मूर्तियां मिलीं, आज भी सर्वे कार्य जारी ,,,।

वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में आज लगातार तीसरे दिन सर्वे हो रहा है। सर्वे सुबह 8 बजे से शुरू हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 4 टीमें सर्वे में जुटीं हुई हैं। कल एएसआई ने दो शिफ्ट में पांच घंटे से ज्यादा समय तक मैपिंग की। सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया कि तहखाने की दीवार पर मनुष्य और पशु के शरीर वाली मूर्ति मिली है।

कल सर्वे के बाद हिंदू पक्ष की ओर से याचिका दायर करने वाली महिला सीता साहू ने एक मूर्ति मिलने का दावा किया है। सीता साहू की मानें तो मूर्ति किसकी है, यह जांच की जा रही है। साहू ने कहा है कि मूर्ति में जो आकृति है, वह आधी पशु और आधी मानव की है। दावा किया जा रहा है कि सर्वे के डर से मुस्लिम पक्ष ने कुछ मूर्तियां इसमें छिपा दी हैं। हिंदू पक्ष चाहता है कि मलबा हटाया जाए।

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बताया जा रहा है कि हिंदू पक्ष की तरफ से आज सिर्फ वकीलों को ही अंदर जाने की इजाजत दी गई है। महिला याचिकाकर्ता ज्ञानवापी परिसर नहीं जाएंगी। वहीं, मुस्लिम पक्ष की तरफ से आज सिर्फ एक वकील रहेंगे। हिंदू पक्ष के सोहन लाल का दावा है कि अगर तहखाना खुला तो कई बड़े प्रमाण मिल सकते हैं, जबकि रेखा पाठक ने भी सीता साहू की बात के आगे बढ़ाते हुए कहा कि पश्चिमी दीवार पर आधा मानव और आधा पशु वाली आकृति मिली है।

एएसआई की टीम के साथ कई वकील भी शामिल

सर्वे के दौरान एएसआई की टीम के साथ कई वकील भी शामिल हैं, जिन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान कुछ जगहों पर मशीन लगाकर जांच की जा रही है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक बगैर खुदाई और तोड़फोड़ के जांच होनी है। वकीलों की मुताबिक ASI के 40 सदस्यों को चार टीमों बांटकर सर्वे जारी है। कई जगहों पर मलबा जमा है।

जीपीआर टेक्नोलॉजी से सामने आएगा सच!

जांच में कई अत्याधुनिक मशीनें भी लगाई गई हैं. जीपीआर लगाए जा रहे हैं। एएसआई के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक बीआर. मणि ने बताया है कि जीपीआर टेक्नोलॉजी का काम बिना तोड़फोड के यह पता लगाना है कि परिसर के नीचे कोई संरचना दबी हुई है भी या नहीं। एएसआई के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक बीआर. मणि ने बताया कि जीपीआर टेक्नोलॉजी में कई प्रकार के स्पेशल डिवाइस शामिल होते हैं। 

सर्वे से क्या हासिल होगा?

बता दें कि ज्ञानवापी सर्वे के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ज्ञानवापी परिसर का निर्माण 17वीं शताब्दी में मंदिर के ढांचे को तोड़कर उसके ऊपर तो नहीं किया गया।