सावधान, ठगी का पैंतरा :: NEET पास छात्र को बनाकर शिकार, इस कॉलेज के नाम पर MBBS एडमिशन के लिए 65 लाख ठगे,,,।
यूपी,,आगरा के फतेहाबाद निवासी एक कारोबारी से उनके बेटे का एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर शातिरों ने 45 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने जौनपुर निवासी एक युवक से भी 20 लाख रुपये ठगे। इस प्रकार कुल मिलाकर 65 लख रुपए की ठगी हुई। मेडिकल कालेज की दाखिला सूची में अपना नाम न पाकर कारोबारी पुत्र को धोखाधड़ी का शक हुआ। उन्होंने ट्रस्ट के नाम पर चेक लेने वाले लोगों से मोबाइल पर संपर्क किया तो वह बंद थे। पीड़ित कार्रवाई के बाद पुलिस के पास पहुंचे।
एक कारोबारी मंगलवार को पुलिस आयुक्त डा. प्रीतिंदर सिंह से मिले। उनके साथ जौनपुर का एक पीड़ित छात्र भी था। कारोबारी ने बताया कि बेटे ने इस वर्ष राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) उत्तीर्ण की है। वह बैचलर आफ मेडिसिन एंड बैचलर आफ सर्जरी (एमबीबीएस) में प्रवेश की तैयारी कर रहे थे। दो महीने पहले बेटे के पास फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को हापुड़ के सरस्वती इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस कालेज से संबंधित बताया। कहा कि उनका निजी कोटे में दाखिला दिला देगा। बातचीत के बाद फोन करने वाले ने अपने लखनऊ स्थित कार्यालय में बुलाया।
प्रवेश के लिए दी थी 9 अक्तूबर की तारीख
कारोबारी ने बताया कि कार्यालय में उन्हें मेडिकल कालेज में प्रवेश के लिए नौ अक्तूबर तारीख दी थी। वह हापुड़ मेडिकल कालेज बेटे को प्रवेश दिलाने गए थे। वहां जानकारी करने पर पता चला कि बेटे का नाम दाखिला सूची में नहीं है। उन्होंने ट्रस्ट के नाम से 43 लाख रुपये के जो चेक दिए थे, वह जमा नहीं हुए थे। इसी तरह की घटना एक अन्य छात्र के साथ भी हुई थी।
उससे भी शातिरों ने 20 लाख रुपये एमबीबीएस में दाखिला कराने के नाम पर लिए थे। कारोबारी ने आरोपियों द्वारा दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया तो वह बंद थे। इससे धोखाधड़ी का शक गहरा गया। कारोबारी द्वारा धनराशि लखनऊ में दी गई थी। पुलिस आयुक्त ने मामले कार्रवाई के लिए लखनऊ पुलिस से संपर्क किया है।
लखनऊ में कार्यालय पर हुई मुलाकात
कारोबारी बेटे को साथ लेकर एक सितंबर विभूति खंड, गोमती नगर स्थित आरोपियों के कार्यालय पहुंचे। शातिरों ने हापुड़ के मेडिकल कालेज के ट्रस्ट से मिलता-जुलता बोर्ड लगा रखा था। बातचीत के बाद आरोपियों ने उनसे 43 लाख रुपये के पांच चेक ट्रस्ट के नाम से लिए। जबकि दो लाख रुपये कारोबारी ने आरोपियों के बैंक खाते में आनलाइन जमा कराए। पांच सितंबर को उनके पांच चेक से भी धनराशि का भुगतान आरोपियों के खाते में पहुंच गया।