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वाराणसी :: पैरों ने नहीं दिया साथ... हाथ को बनाया हथियार; काशी की बेटी सुमेधा ने शूटिंग में जीते 13 मेडल,,,।

वाराणसी :: पैरों ने नहीं दिया साथ... हाथ को बनाया हथियार; काशी की बेटी सुमेधा ने शूटिंग में जीते 13 मेडल,,,।

वाराणसी :: खेल से संघर्ष की सीख मिलती है। खेल की मदद से खिलाड़ी जीतता है या सीखता है। इसमें हार कभी नहीं होती है। यह कहना है मानस नगर एक्सटेंशन निवासी 10 मीटर शूटिंग में 13 पदक जीत चुकी सुमेधा पाठक का। सुमेधा ने कहा कि दसवीं तक उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी। वह सामान्य छात्रों की तरह खेलती और पढ़ती थीं। 

दसवीं के दौरान 2013 में उन्हें मल्टी ड्रग ट्यूबरक्लॉसिस बीमारी ने अटैक किया और शरीर के निचले हिस्से में कमर से लेकर पैरों तक ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद से शुरू संघर्ष में परिवार ने हौसला बढ़ाया और उन्होंने शूटिंग करने का फैसला किया। 

10 मीटर एयर पिस्टल में अभ्यास शुरू किया। 2018 में प्री-स्टेट शूटिंग में स्वर्ण जीतकर शानदार आगाज किया। स्टेट प्रतियोगिता के बाद मद्रास में जीवी मावलंकर प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। 2021 में दूसरे पैरा नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। 

तीसरे और चौथे पैरा नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण जीता। 2022 में फ्रांस के सेटूरेक्स वर्ल्ड कप और कोरिया में टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। 2023 में चीन में एशियन गेम्स की शूटिंग प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची और सातवां स्थान हासिल किया।

पीएम फंड में किया था 21 हजार का योगदान

सुमेधा ने पुलवामा हमले में शहीद परिवार के लिए पीएम फंड में 21 हजार का योगदान दिया था। काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका हौसला बढ़ाया था। वाराणसी के संतोष तिवारी उनके कोच हैं। जेपी नौटियाल उनके राष्ट्रीय कोच हैं।