ममता दीदी, केजरीवाल और ओवैसी के झांसे में मत आना, CAA के पक्ष में मुस्लिम समुदाय से इस्लामिक स्कॉलर की अपील,,,।
नागरिकता संशोधन कानून पर जहां एक तरफ सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कई मुस्लिम स्कॉलर्स ने देशभर के मुसलमानों से किसी नेता के बहकावे में न आने की अपील की है। मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MAANU) के पूर्व चांसलर फिरोज बख्त अहमद ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से देशभर के मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लिए सीएए के बारे में बहस या विरोध करने का कोई आधार ही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि CAA का सरोकार मुसलमानों से नहीं है।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अहमद ने कहा, "आज हर चैनल पर CAA पर बहस हो रहा है, जिससे यह धारणा बन गई है कि इसमें केछ पेच है, जबकि इस कानून में बहस करने के लिए कुछ भी नहीं है।" उन्होंने कहा कि यह कानून लोगों को नागरिकता का अधिकार देने के बारे में है, किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं बनाया गया है। उन्होंने सीएए के खिलाफ नेताओं के बयानों पर भरोसा नहीं करने और उनके बहकावे में नहीं आने की अपील की है।
बता दें कि दिसंबर 2029 में संसद ने 1955 के नागरिकता कानून में संशोधन किया है, जिसे केंद्र सरकार ने सोमवार को लागू किया है। बदले हुए नियम के तहत 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आ चुके हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध धर्म के शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। इसमें मुस्लिम शरणार्थियों को शामिल नहीं किया गया है।
जब उनसे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के मुद्दे के बारे में पूछा गया, जिसे ममता बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी जैसे विपक्षी दलों के नेताओं ने उठाया है, तो अहमद ने कहा, “एनआरसी कल आना है, वह आज ही आ जाए।" उन्होंने पूछा कि किसी भी भारतीय मुसलमान को इनसे क्यों डरना चाहिए? जिन्होंने इस देश के लिए बलिदान दिया है, अंग्रेजों के खिलाफ अपना खून बहाया है। अहमद ने कहा, "मुसलमानों को इसकी भी चिंता नहीं होनी चाहिए? पाकिस्तान सहित कई अन्य इस्लामिक देशों में भी एनआरसी है। इसलिए, केवल अवैध अप्रवासियों को ही एनआरसी से डरना चाहिए।''
AIMIM चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को दावा किया था कि सीएए के बाद एनआरसी लाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि संसद में अमित शाह ने उनका नाम लेकर कहा था कि सीएए भी आएगा और एनआरसी भी आएगा। ओवैसी ने दावा किया कि सीएए को राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के साथ जोड़ कर देखा जाना चाहिए। ओवैसी ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहता हूं कि केवल सीएए को ही मत देखिए। आपको इसे एनपीआर और एनआरसी के साथ देखना होगा। जब वह होगा तब बेशक निशाने पर मुख्य रूप से मुसलमान, दलित, आदिवासी और गरीब होंगे।’’
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भाजपा नेताओं ने डर फैलाने का आरोप लगाया गया था, जब उन्होंने एक सभा में कहा था, “जिस क्षण आप सीएए के तहत आवेदन करेंगे, आपकी नागरिकता छीन ली जाएगी। आपकी संपत्ति का क्या होगा? वे तुम्हें हिरासत शिविरों में ले जायेंगे।”
दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को लागू करना भाजपा की ‘‘वोट बैंक की गंदी राजनीति'' है। उन्होंने कहा कि लोग चाहते हैं कि इस कानून को निरस्त किया जाए। उन्होंने दावा किया कि सीएए लागू होने के बाद अगर पड़ोसी देशों के 1.5 करोड़ अल्पसंख्यक भी भारत आ गए तो खतरनाक स्थिति पैदा हो जाएगी।