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बारिश के बाद लखनऊ की सड़कों पर सिर्फ पानी नहीं बहा... बह गई एक जिंदगी, एक परिवार की उम्मीदें, ये सुरेश लोधी की नहीं, सिस्टम की मौत...

बारिश के बाद लखनऊ की सड़कों पर सिर्फ पानी नहीं बहा... बह गई एक जिंदगी, एक परिवार की उम्मीदें, ये सुरेश लोधी की नहीं, सिस्टम की मौत...

लखनऊ। बारिश के बाद लखनऊ की सड़कों पर सिर्फ पानी नहीं बहा... बह गई एक जिंदगी, एक परिवार की उम्मीदें और सिस्टम पर से भरोसा। ठाकुरगंज के नाले में बहे पेंटर सुरेश लोधी (32) का शव आखिरकार 28 घंटे बाद गऊघाट पर गोमती किनारे मिल गया। 

मगर जिस तरह से पहले उनके बहने की घटना से ही इन्कार किया गया, फिर उन्हें ढूंढने में लापरवाही बरती गई, परिजनों पर लाठीचार्ज किया गया, इन घटनाक्रमों ने हादसे को अमानवीयता की कहानी में बदल दिया। जनता तो सिर्फ यही कह रही है कि ये सुरेश लोधी की नहीं, सिस्टम की मौत है।

हद तो ये हुई कि 10 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाकर नगर निगम और एसडीआरएफ कर्मी रात में चले गए। परिवार और मोहल्ले के लोग सुरेश की तलाश में रातभर नाले के खुले हिस्से और गोमती के मुहाने पर निगरानी करते रहे। रविवार सुबह 11 बजे उनका शव गऊघाट के पास जाल में फंसा मिला। यहां नाला गोमती में गिरता है।

पेंटर सुरेश शनिवार सुबह मंजू टंडन रोड के पास काम पर निकले थे। बारिश के बाद उफनाए खुले नाले में फिसलकर गिर गए। आसपास के लोगों ने बताया कि नाले की स्लैब टूटी हुई थी। चेतावनी बोर्ड तक नहीं था।

शव निकलने के बाद पहुंची टीम

मनोज वर्मा ने बताया कि चचेरे भाई सुरेश का शव सबसे पहले स्थानीय सफाई कर्मचारी बुद्धा को दिखा। उन्होंने परिजनों को सूचित किया। कड़ी मशक्कत के बाद शव नाले से निकाला जा सका। इसके एक घंटे बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। पोस्टमार्टम के बाद शाम करीब चार बजे शव सुरेश के परिजनों को सौंप दिया गया।

रोती रहीं रेनू...बोलीं-अब बेटी की शादी कैसे होगी

सुरेश की पत्नी रेनू और तीन बच्चे इस हादसे के बाद बेसहारा हो गए हैं। परिवार का पालन-पोषण करने वाले एकमात्र सदस्य की मौत से रेनू बार-बार सिर्फ एक बात कहती रहीं- बेटी की शादी के लिए पैसे जोड़ रहे थे। अब क्या होगा? स्थानीय लोगों ने बताया कि सुरेश हमेशा हर मुसीबत में पड़ोसियों के काम आते थे। उनके निधन से मोहल्ले में गहरा शोक है।

मृतक के घर तक नहीं गए जिम्मेदार

महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार व कोई भी बड़ा नेता सुरेश के परिवार को ढाढ़स बंधाने राधाग्राम योजना स्थित उनके घर तक नहीं पहुंचे। पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, डीएम विशाख जी, विधायक नीरज बोरा, महापौर ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर उपस्थिति दर्ज करा ली। स्थानीय लोगों का कहना था कि हंगामे के डर से कोई भी अफसर सुरेश के घर नहीं गया। आम आदमी पार्टी की जिलाध्यक्ष इरम रिजवी ने घर जाकर सांत्वना दी।