'यह खिलौना लो और इससे खेलते रहो',कांग्रेस के विधायक ने SDM को झुनझुना थमाया और कहा अधिकारी ने पुलिस में दी शिकायत...
हरियाणा के कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस ने कैथल जिले के एक एसडीएम को झुंझुना देने की कोशिश करने के बाद एसडीएम ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विधायक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और उन पर अपने आधिकारिक कर्तव्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया।
गुहला-चीका निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हंस ने आरोपों से इनकार किया और इसके बजाय 2023 बैच के हरियाणा सिविल सर्विस ऑफिसर एसडीएम प्रमेश सिंह पर उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाया।
अब पूरे विवाद की बात करें तो यह गुहला-चीका में मौजूद बीडीपीओ कार्यालय परिसर में स्थित दुकानों को लेकर है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ दुकानों का विस्तार दुकानदारों के आग्रह पर किया गया था, जबकि हंस के समर्थकों का दावा है कि यह विस्तार अवैध है। सोमवार को उस समय तीखी बहस छिड़ गई जब हंस अपने समर्थकों के साथ कार्यालय के सामने एसडीएम से भिड़ गए।
अधिकारी के जवाब से नाराज हंस ने कहा, “यह खिलौना लो और इससे खेलते रहो।” एसडीएम ने मना करते हुए जवाब दिया, “तुम इसे खुद रख लो।” नाराज हंस ने खिलौना फेंक दिया और समर्थकों के नारों के बीच परिसर से चले गए।
एसडीएम ने की शिकायत
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एसडीएम ने कहा, "मैंने कैथल एसपी के पास विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दुकानों से संबंधित मेरी जांच के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश की और बिना सबूत के मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। मैं आपराधिक मानहानि के लिए कानूनी नोटिस भी जारी करूंगा।"
उन्होंने आगे बताया कि शिकायत की एक कॉपी कैथल डीसी को भी भेजी गई है। एसडीएम ने कहा, "गुहला में पंचायत समिति के स्वामित्व में कई दुकानें हैं। कुछ दुकानें लंबी थीं और छोटी दुकानें थी। विधायकों ने बराबर विस्तार की मांग की। काम के दौरान आपत्तियां उठाई गईं और मेरी जांच पूरी होने तक निर्माण का काम रोक दिया। जांच में पाया गया कि प्रोसेस नियमों के हिसाब से ही था और मैंने अपनी रिपोर्ट डीसी को सौंप दी है।"
विधायक ने आरोपों को खारिज किया
हंस ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "अगर वह मेरे फोन का जवाब तक नहीं देते, तो मैं उन पर दबाव कैसे डाल सकता हूं? मैंने रात में दुकानों के पास, उनके घर से मुश्किल से सौ मीटर की दूरी पर, अवैध काम होते देखा। मैंने उन्हें सात-आठ बार फोन करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। जब आधे घंटे बाद उन्होंने आखिरकार फोन उठाया, तो मैंने उन्हें चल रहे काम के बारे में बताया, फिर भी वह मौके पर नहीं आए। जब हमने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई, तभी वह आए।"
कार्यालय में हुई बहस के बारे में बताते हुए हंस ने कहा, "मैं आधे घंटे तक उनके कार्यालय के बाहर खड़ा रहा। जब तक मैंने जोर नहीं दिया, उन्होंने बाहर आने से इनकार कर दिया। जब आखिरकार वह बाहर आए, तो उन्होंने मेरे सवालों का जवाब देने से बचते रहे। तभी मैंने उनसे कहा, ‘यहां तुम्हारा कोई अधिकार नहीं है, इस खिलौने को लो और इससे खेलते रहो।’"