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मुंबई: 25000 करोड़ का बैंक घोटाला, EOW से क्लीनचिट, फिर भी सुनेत्रा पवार की गर्दन पर लटकी तलवार, समझिए कैसे...

मुंबई: 25000 करोड़ का बैंक घोटाला, EOW से क्लीनचिट, फिर भी सुनेत्रा पवार की गर्दन पर लटकी तलवार, समझिए कैसे...

मुंबई। दिवंगत अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन गई हैं। सुनेत्रा पवार 25,000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएससीबी) घोटाले में कानूनी जांच के दायरे में हैं। इस घोटाले में ईडी ने अपने आरोपपत्र में अजीत पवार के साथ उनका भी नाम शामिल किया था। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने दंपति को क्लीन चिट दे दी, लेकिन ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इसे बंद करने पर आपत्ति जताई और मामला अदालत में लंबित है।

आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति कानून के तहत सुनेत्रा पवारऔर अजित की भी जांच की थी। इसके बाद एजेंसी ने 1,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की थीं। लेकिन दंपति को न्यायनिर्णय प्राधिकरण और फिर अपीलीय न्यायाधिकरण से राहत मिल गई थी। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि संपत्ति के लिए भुगतान किए जाने के सबूत के अभाव में दंपति को वास्तविक मालिक नहीं माना जा सकता।

 खेल ऐसे सहकारी बैंकों के जरिए हुआ

एमएससीबी का मामला राज्य के सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में से एक रहा, क्योंकि इसमें सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दलों के कई राजनेता शामिल थे। यह घोटाला एमएससीबी के अंतर्गत आने वाले 31 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से संबंधित था। अधिकांश का नाम जिलों के नाम पर रखा गया था और उनके प्रमुख वरिष्ठ राजनेता थे। इन बैंकों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए सहकारी चीनी कारखानों को ऋण दिए थे।

बॉम्बे हाई कोर्ट तक मामला, फिर FIR

आरोप है कि इन चीनी मिलों के 2002 से 2017 के बीच भुगतान में चूक करने के कारण एमएससीबी को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बाद में एमएससीबी ने ऋण वसूली के बहाने चीनी कारखानों और उनकी जमीनों की नीलामी बहुत कम कीमतों पर कर दी, जिनमें से अधिकांश बैंक प्रमुखों के रिश्तेदारों को बेची गईं। बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई और हाई कोर्ट के निर्देश पर 2019 में जांच शुरू करने के लिए एफआईआर दर्ज की गई। इसी के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। बाद में, तत्कालीन विपक्ष के नेता अजित पवार एनसीपी तोड़कर बीजेपी और शिंदे सेना की महायुति सरकार में शामिल हो गए।

ऐसे हुआ नीलामी का खेल

जब अजित एमएससीबी से जुड़े थे, तब जारंदेश्वर शुगर कोऑपरेटिव मिल की खरीद के सिलसिले में सुनेत्रा का नाम ईडी की जांच के दायरे में आया। ईडी ने बताया कि एमएससीबी ने 2010 में एक नीलामी में मुंबई स्थित एक बिल्डर से जुड़ी गुरु कमोडिटी प्राइवेट लिमिटेड को यह मिल 65.7 करोड़ रुपये में बेची थी। इसके तुरंत बाद, गुरु कमोडिटी ने नवगठित निजी कंपनी जारंदेश्वर शुगर को 12 लाख रुपये के वार्षिक शुल्क पर मिल पट्टे पर दे दी। ईडी ने कहा कि जारंदेश्वर शुगर मिल्स लिमिटेड के निदेशक राजेंद्र घड़गे, अजित पवार के मामा हैं, जो उस समय बैंक के निदेशक थे। नीलामी में मिल की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई धनराशि का अधिकांश हिस्सा जारंदेश्वर शुगर से प्राप्त हुआ था, जिसे बदले में जय एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड से 20 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें सुनेत्रा पवार निदेशक थीं।इनकम टैक्स फिर खोलेगा केस?

आयकर विभाग के निष्कर्षों को एक्टिविस्ट अंजली दमानिया ने चुनौती थी। उन्होंने कहा कि पिछले साल मैंने आयकर विभाग को पत्र लिखकर पवार परिवार के खिलाफ मामला फिर से खोलने का अनुरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने गणपति डीलकॉम मामले में अपने उस आदेश को वापस ले लिया था जिसमें कहा गया था कि बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016 को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के उसी आदेश के आधार पर उन्हें राहत मिली थी। मैंने आयकर अधिकारियों से अनुरोध किया था कि वे पवार और भुजबल परिवार की उन संपत्तियों को अधिनियम के तहत फिर से जब्त करें जिन्हें पहले उसी आदेश के आधार पर मुक्त कर दिया गया था, क्योंकि अब सुप्रीम कोर्ट उस आदेश को वापस ले रहा है।