एक के बाद एक कई बड़ी परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं और कई पूरी होने वाली हैं वहीं,पीएम के संसदीय क्षेत्र बनारस में जल जीवन मिशन योजना फेल...
वाराणसी, ब्यूरो। प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विकास आसमान पर है, एक के बाद एक कई बड़ी परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं और कई पूरी होने वाली हैं। पीएम मोदी ने बनारस से परियोजनाओं की जो सौगात दी। 15 अगस्त 2019 को पीएम मोदी ने सुदूर गांव में रहने वाले लोगों को शुद्ध जल उनके घरों में नल के जरिए पहुंचने का जो संकल्प लेकर जल शक्ति मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना की शुरुआत की है।
बनारस में इस योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में 2019 में शुरू हुई इस परियोजना की हकीकत भले ही कागजों में दुरुस्त हो लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में असलियत सामने आ गयी है।
अधिकारियों ने कागजों में तो हर घर तक नल पहुंचने का दावा कर लिया। ओवरहेड टैंक बन गए, घर-घर पाइपलाइन भी बिछ गई। लेकिन इन सारे दावों की हकीकत ग्राउंड रिपोर्ट में जब सामने आई कि सब कुछ क्लियर हो चुका है।
सबसे पहले हमने वाराणसी के टिकरी इलाके से कुछ दूरी पर बसे नैपुराकला ग्राम सभा में पहुंचकर यहां की हकीकत जानी...। यहां की आबादी लगभग 4500 के आसपास है और अलग-अलग बस्तियां में छोटे-छोटे हिस्सों में लोग रहते हैं, इन बस्तियों में एक बस्ती राजभर जाति की है, जहां बड़ी संख्या में लोग आज भी पानी के इंतजार में है सबसे बड़ी बात यह है कि लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से इस इलाके में विकास कार्यों के लिए काम शुरू हुआ।
हर घर नल से शुद्ध जल पहुंचने के लिए लगभग 9 महीने पहले पाइपलाइन दौड़ाई गई और घरों के बाहर नीले रंग की पाइप लगाकर छोड़ दिया गया, लेकिन आज भी इस पाइप में पानी आने का इंतजार है। हालत यह है कि गांव में लगे लगभग 40 हैंड पंप में से चार या पांच ही काम कर रहे हैं, बाकी सब खराब पड़े हैं। उनकी रि बोरिंग के लिए भी फंडिंग हुई, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
लंबी-लंबी पाइप लोगों के घरों तक जाती दिखाई दी। हम सोचे यह पाइप सरकारी है, लेकिन पता चला लगभग 8 साल पहले लोगों ने अपने खर्चे पर डेढ़ से 2000 का चंदा इकट्ठा करके बोरिंग करवाई और इस बोरिंग के जरिए घर-घर तक लोग सुबह-शाम पानी लेते हैं, लेकिन अब यह बोरिंग भी खराब हो रही है और पानी में बालू आ रही है। जिससे यह पीने योग्य भी नहीं है। यहां थोड़ा अजीब जरूर लगा, क्योंकि दूर-दूर तक सिर्फ पाइप ही पाइप थी और यही पाइप लोगों के सबसे बड़ी जरूरत पानी का सहारा है।