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PM मोदी के इजराइली संसद में भाषण देने पर मुस्लिम वर्ल्ड आगबबूला, जानें इस्लामिक देशों का रिएक्शन...

PM मोदी के इजराइली संसद में भाषण देने पर मुस्लिम वर्ल्ड आगबबूला, जानें इस्लामिक देशों का रिएक्शन...

PM Modi Israel Visit Muslim World Reaction: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल दौरे के पहले दिन इजरायली संसद नेसेट को संबोधित किया। इस ऐतिहासिक मौके पर उन्हें 'मेडल ऑफ द नेसेट' से सम्मानित किया गया।यह पहली बार था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नेसेट में भाषण दिया। 

नेसेट में भाषण देते हुए पीएम मोदी ने भारत-इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए इजराइल के 7 अक्टूबर हमलों और मुंबई के 26/11 आतंकी हमले का भी जिक्र किया। 

मोदी ने आतंकी हमलों को 'बर्बर' बताते हुए कहा, हम इजरायल के दुख में उनके साथ खड़ें हैं। निर्दोष नागरिकों की हत्या किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। नेतन्याहू की मौजूदगी में मोदी ने अब्राहम एकॉर्ड्स की भी सराहना की। इजराइली संसद में मोदी के भाषण पर मुस्लिम वर्ल्ड का क्या रिएक्शन रहा, जानते हैं।

तुर्की के TRT World की रिपोर्ट: हमास की निंदा, पर गाजा का जिक्र नहीं

तुर्की के सरकारी मीडिया TRT World ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि मोदी ने नेसेट में इजरायल की खुलकर प्रशंसा की, जिसे गाजा युद्ध के बीच नेतन्याहू के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। मोदी ने नेतन्याहू को गले लगाया, हमास की निंदा की, लेकिन गाजा का जिक्र नहीं किया। रिपोर्ट में कहा गया कि गाजा में इजरायली कार्रवाई से हजारों फिलिस्तीनियों की मौत पर मोदी ने टिप्पणी नहीं की और अक्टूबर 2023 के हमलों की निंदा पर ज्यादा जोर दिया।

Al Jazeera: पारंपरिक फिलिस्तीन नीति से बदलाव?

कतर बेस्ड मीडिया नेटवर्क Al Jazeera ने लिखा कि यह दौरा भारत की पारंपरिक फिलिस्तीन समर्थक नीति से एक वैचारिक बदलाव को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस यात्रा में रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दी गई और गाजा के मानवीय संकट पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नेतन्याहू और मोदी दोनों को राष्ट्रवादी और सख्त रुख वाले नेता माना जाता है। साथ ही कश्मीर, फिलिस्तीन और वेस्ट बैंक जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया।

Middle East Eye: विदेश नीति में नई दिशा?

ब्रिटेन बेस्ड पोर्टल Middle East Eye ने लिखा, नेसेट में मोदी का भाषण भारत की पुरानी विदेश नीति से अलग दिशा का संकेत देता है। रिपोर्ट में हिंदुत्व और ज़ायोनिज्म के बीच वैचारिक समानता की चर्चा की गई। लेख में कहा गया कि यह दौरा रक्षा समझौतों और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना भी हुई। गाजा में बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों की मौत और अंतरराष्ट्रीय अदालत में चल रहे मामलों का जिक्र करते हुए कहा गया कि भारत ने इजरायल के साथ सहयोग जारी रखा है।

Palestine Chronicle: राजनीतिक संदेश का संकेत

फिलिस्तीनी के Palestine Chronicle ने लिखा, गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी रहने के दौरान नेसेट में तालियां बजाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है। रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध अपराधों के आरोपों के बीच किसी बड़े देश के प्रधानमंत्री की मौजूदगी यह दर्शाती है कि इजरायल पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग नहीं है।

पाकिस्तानी अखबार DAWN की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने लिखा, मोदी ने अपने भाषण में गाजा में दो साल से अधिक समय से चल रहे युद्ध और हजारों फिलिस्तीनियों की मौत का जिक्र नहीं किया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता की हर कोशिश का समर्थन करता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इस दौरे में उन्होंने किसी फिलिस्तीनी नेता से मुलाकात नहीं की।