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अस्सी श्रीकाशीधर्मपीठ रामेश्वर मठ श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के 5 वें दिन शनिवार को प्रवचन में स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने कहीं ये...

अस्सी श्रीकाशीधर्मपीठ रामेश्वर मठ श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के 5 वें दिन शनिवार को प्रवचन में स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने कहीं ये...

भगवान में ही सारा ब्रह्मांड है समाहित : स्वामी नारायणानंद तीर्थ

वाराणसी ब्यूरो, 28 मार्च। भगवान की लीला के अनेक दृष्टियां होती हैं। श्रीमद्भागवत के प्रत्येक पात्र भागवत हैं। भगवान ने असुरों को मार कर अपने में मिला लिया क्योंकि असुरों के मूल भी भगवान हैं। भगवान ने पूतना, अघासुर, बकासुर और कंस का वध कर उन्हें सद्गति प्रदान की। जगद्गुरु स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने ये बातें अस्सी स्थित श्रीकाशीधर्मपीठ रामेश्वर मठ में श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन शनिवार को प्रवचन में कहीं। 

जगद्गुरु ने कहा कि सृष्टि में वात्सल्य की असीम शक्ति मां है। मां का निराकार भाव ही दूध के रूप में साकार होकर आता है। हर मां का छोटा सा बालक उसके लिए भगवान का रूप होता है। उसके भीतर संपूर्ण विश्व छिपा है। यशोदा मैया ने भगवान श्रीकृष्ण के मुख में दो बार संपूर्ण ब्रह्मांड देखा। मां पूर्णता और एकाग्रता की भावना से अपने बच्चे की रक्षा करती है।

जगद्गुरु ने कहा कि महापुरुषों के आशीर्वाद, भगवान की करुणा और भक्ति के सामर्थ्य इन तीनों से जो लीला होती है उससे शिक्षा मिलती है कि भगवान के मन में कामना आयी तो क्रोध भी आया। भगवान को बंध जाना पड़ता है तो जीवों की बात ही क्या है। भगवान की लीला पूतना वध से प्रारंभ होती है। धीरे-धीरे मामा कंस के भेजे हुए असुर को अपने में मिला लिया। 

इस सृष्टि में सभी भगवान के अंश है। सूर्य में दिन-रात का भेद नहीं होता है। ब्रह्म में जीव और जगत का भेद नहीं होता है। ये तत्व दृष्टि है। मक्खन चोरी की लीला, चीरहरण की लीला, रासलीला कंस जैसे पापियों का वध कर के भगवान ने सभी का कल्याण किया।