भारतीय नववर्ष : भूल गए क्यों एक चैत्र को, क्यों एक जनवरी याद रहा... ईश्वरनगर में भारत माता आरती के दौरान लोगों ने कहा- वंदे मातरम...
डिजिटल डेस्क, भागलपुर। ईश्वरनगर में चैत्र शुक्ल पक्ष एक भारतीय नववर्ष के शुभ अवसर पर भारत माता की भव्य महाआरती अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।यह आयोजन जागृत युवा समिति के तत्वाधान में आयोजित किया गया। इसमें समिति के सदस्यों के अलावा, आरएसएस के स्वयंसेवकों, भाजपा नेता, स्थानीय लोग मौजूद थे।
दीप प्रज्वलन और आस्था का उत्सव
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा और मां भारती की आरती के साथ दीप प्रज्वलित किए। सैकड़ों दीपों की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा, जिससे भारतीय संस्कृति और आस्था की अनूठी छवि देखने को मिली। इसके पश्चात उपस्थित लोगों के बीच मिठाइयों का वितरण कर नववर्ष की खुशियां साझा की गईं।
भारतीय नववर्ष की वैज्ञानिकता और महत्ता
इस अवसर पर वक्ताओं ने भारतीय नववर्ष की वैज्ञानिकता और महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय पंचांग की विशेषता यह है कि इसमें आज से वर्षों बाद लगने वाले ग्रहणों की सटीक जानकारी भी पहले से उपलब्ध रहती है। लोगों से अपील की गई कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को न भूलें और नववर्ष को पूरे उत्साह के साथ मनाएं।
समाज में जागरूकता और संस्कृति का संदेश
कार्यक्रम में स्थानीय कवि और वक्ता प्यारे हिंद ने बताया कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पिछले कई वर्षों से निरंतर किया जा रहा है और हर वर्ष इसमें लोगों की भागीदारी बढ़ती जा रही है।
सहयोगियों और समाजसेवियों का योगदान
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में वार्ड पार्षद कल्पना देवी का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा श्रीधर मिश्र, रवि, राजीव, महेश साह, सतीश, राजेंद्र वर्मा, चंद्रशेखर साह, मनोहर, दीनदयाल भारती, सुमित चंद्रवंशी, हर्ष भारती, अमित आनंद, आनंद भारती, संदीप कुमार, बुलबुल देवी, वंदना कुमारी और सिया दिदी सहित अनेक समाजसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्कृति और साहित्य की झलक
भारतीय नववर्ष पर ईश्वरनगर के विषहरी और दुर्गा मंदिर में भी भारत माता की आरती का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय कवि प्यारे हिंद ने अपनी कविताएं पढ़ीं। उनकी स्वरचित कविता "भूल गए क्यों एक चैत्र को, क्यों एक जनवरी याद रहा, रोम-राम बसे राम का, राज्याभिषेक नहीं याद रहा..." ने सभी को भारतीय संस्कृति की ओर प्रेरित किया।
नववर्ष का उत्सव पूरे ईश्वरनगर में धूमधाम से मनाया गया। घरों, मंदिरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थलों पर भगवा ध्वज फहराए गए। कई जगह रंगोली बनाई गई और सुंदरकांड, श्रीरामचरितमानस पाठ आदि का आयोजन भी हुआ।समाज में प्रेरणा और संस्कृति का संदेश
पूरा नववर्ष उत्सव अनुशासन, एकता और भारतीय संस्कृति की झलक पेश करता रहा। संघ के पथ संचलन और योगपीठ के कार्यक्रम ने न केवल राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत किया, बल्कि समाज में संस्कृति और परंपरा की सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया।