कोई भी अपनी बेटी की शादी मुझसे नहीं करना चाहता था, इसलिए मैं भी शराबी बन गया... पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने बताई आपबीती...
नईदिल्ली खेल, ब्यूरो। भारत के पूर्व लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने हाल ही में कमेंट्री से रिटायरमेंट की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट में रंगभेद को लेकर हैरान करने वाला खुलासा भी किया। इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में शिवरामकृष्णन ने अब बताया कि कैसे उनके गहरे रंग के कारण उन्हें भारतीय क्रिकेट में साइडलाइन किया गया. इस भेदभाव के कारण वह डिप्रेशन में चले गए और शराब पीने के आदि हो गए थे।
शिवरामकृष्णन ने बताया कि एक समय वह मानसिक रूप से इतने टूट चुके थे कि उन्हें आईने में अपनी शक्ल देखने से भी डर लगता था. उन्हें हर वक्त ऐसा महसूस होता था कि वह मर जाएंगे. सिर्फ इतना नहीं, भेदभवा के कारण उनकी छवि ऐसी बन गई थी उनकी शादी तक नहीं हो पा रही थी.उन्होंने अपनी इस हालत का जिम्मेदार सालों से झेले जा रहे रंगभेद और अपने सांवले रंग को लेकर की गई टिप्पणियों को बताया है।
चलती कार से कूदना चाहते थे शिवरामकृष्णन
शिवरामकृष्णन ने कहा, "आईपीएल के दौरान जब मैं यूएई में था तब मेरा तनाव इतना बढ़ गया था मैं खुद को कमरे में बंद रखता था और समय का होश खो देता था. मुझे डरावने भ्रम होने लगे थे और गाड़ी में सफर करते समय मैं कभी-कभी सोचता था कि दरवाजा खोलकर बाहर कूद जाऊं, लेकिन किसी तरह मैंने खुद को संभाला।"
उन्होंने कहा, "कमेंट्री के अपने 23 साल के लंबे करियर में भी मैंने भेदभाव का सामना किया. मुझे कभी टॉस या मैच की प्रेजेंटेशन करने का मौका नहीं दिया गया और जब मैंने इसका कारण पूछा तो बताया गया कि ऊपर से आदेश हैं क्योंकि मैं दिखने में प्रेजेंटेबल यानी अच्छा नहीं हूं. इस पर मैंने सवाल भी उठाए कि क्या महान टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज का रंग गहरा नहीं है, जबकि वह दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रोफेशनल्स में से एक हैं।"
14 साल की उम्र से शुरू हो गया था भेदभाव
शिवरामकृष्णन ने यह भी बताया कि उनके साथ यह भेदभाव 14 साल की उम्र से ही शुरू हो गया था, जब एक सीनियर खिलाड़ी ने उन्हें मैदान का कर्मचारी समझ लिया था। उन्होंने भारतीय ड्रेसिंग रूम के अंदर भी रंगभेद के कड़वे अनुभवों का जिक्र किया. इन सब बातों ने बचपन में ही उनके आत्मविश्वास को पूरी तरह तोड़ दिया था।