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क्या इस बार टूटेगी? होलिका दहन के अगले दिन होली खेलने की परंपरा, हो गया बड़ा मसला, चंद्र ग्रहण के दौरान ही खत्‍म हो जाएगी पूर्णिमा...

क्या इस बार टूटेगी? होलिका दहन के अगले दिन होली खेलने की परंपरा, हो गया बड़ा मसला, चंद्र ग्रहण के दौरान ही खत्‍म हो जाएगी पूर्णिमा...

Holi kab manai jayegi : होलिका दहन और होली खेलने को लेकर ज्योतिषाचार्यों और पंचांग के बीच चल रही बहस अब खत्म होने को है। क्‍योंकि अब इसके लिए समय ही बाकी नहीं रहा। हालांकि अच्‍छी बात यह है कि होलिका दहन करने की तारीख और होली मनाने की तारीख को लेकर काफी हद तक एक राय बन गई है। 3 मार्च को लग रहे चंद्र ग्रहण के कारण ये संकट पैदा हुआ है। जिससे होलिका दहन के अगले दिन होली खेलने की सदियों पुरानी परंपरा भी टूटने जा रही है। जानिए आखिरकार होली कब जलेगी और रंगों वाली होली कब खेली जाएगी।

होली कब, 3 मार्च या 4 मार्च?

होली इस साल 4 मार्च को खेली जाएगी। ज्‍योतिषीय गणनाओं और पंचांग के आधार पर 4 मार्च 2026, बुधवार को होली मनाना सही होगा. यानी कि इस साल धुलैण्‍डी 4 मार्च को है। जबकि होलिका दहन इससे एक दिन पहले नहीं, बल्कि 2 दिन पहले होगा। हर साल फाल्‍गुन पूर्णिमा की शाम या रात को होलिका दहन होने के बाद अगले दिन होली मनाई जाती है, लेकिन इस साल सदियों पुरानी परंपरा टूटने वाली है।

चंद्र ग्रहण के कारण होली मनाने में 1 दिन की देरी

3 मार्च को लग रहे चंद्र ग्रहण के कारण ये गड़बड़झाला हो रहा है और होली का पर्व होलिका दहन के अगले दिन की बजाय 1 दिन के अंतर के बाद मनाया जाएगा। इस साल होलिका दहन 2 मार्च 2026 की मध्‍यरात्रि को होगा. क्‍योंकि 2 मार्च की शाम को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के बाद भद्रा भी लग जाएगी।

वहीं 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से चंद्र ग्रहण का सूतक लग जाएगा। चंद ग्रहण 3 मार्च की दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा लेकिन शाम को जब तक ग्रहण खत्‍म होगा, तब तक पूर्णिमा तिथि भी समाप्‍त हो जाएगी। ऐसे में शास्‍त्रों के अनुसार 3 मार्च को होलिका दहन करना कतई सही नहीं होगा। क्‍योंकि चंद्र ग्रहण के सूतक काल और चंद्र ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, इसी तरह भद्रा काल में भी शुभ-मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।

2 मार्च को होलिका दहन का समय

वहीं शास्त्रों की मान्यता और ज्‍योतिषीय गणना के आधार पर इस होलिका दहन करने के लिए 3 मुहूर्त सबसे अच्‍छे रहेंगे। पहला मुहूर्त 2 मार्च को प्रदोष काल का समय है - जो कि शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट के बीच का है। वहीं जो लोग होलिका दहन में भद्रा पूंछ काल का पालन करते हैं, उनके लिए रात 12 बजकर 50 मिनट के बाद सुबह करीब 3 बजे तक होलिका दहन कर लेना उचित रहेगा।

इसके बाद 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और उसके सूतक काल के कारण पूजा-पाठ आदि सभी कार्यों पर रोक रहेगी। मंदिरों के पट शाम को ग्रहण खत्‍म होने तक बंद रहेंगे। लिहाजा होली भी अगले दिन 4 मार्च को मनाई जाएगी।

(Disclaimer - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। केसरी न्यूज 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.)।।