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'दोस्ती में बिना इजाजत यौन संबंध को सही नहीं ठहराया जा सकता', पॉस्को केस में हाई कोर्ट का जमानत से इनकार...

'दोस्ती में बिना इजाजत यौन संबंध को सही नहीं ठहराया जा सकता', पॉस्को केस में हाई कोर्ट का जमानत से इनकार...

नईदिल्ली, ब्यूरो। दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो केस में आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी खास मौके या दोस्ती के आधार पर बिना इजाजत यौन संबंध को सही नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आरोपी वसीम अख्तर की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई लड़की किसी लड़के के साथ दोस्ताना है और दिन वैलेंटाइन डे का है, इसका मतलब यह नहीं कि लड़के को जबरदस्ती संबंध बनाने का अधिकार मिल जाता है।

कोर्ट ने 20 मार्च को दिए अपने फैसले में यह भी कहा कि किसी लड़की की मांग में उसकी इजाजत के बिना सिंदूर भरना भी सही नहीं है, भले ही यह अलग से परिभाषित अपराध न हो। हाई कोर्ट ने पीड़िता के व्यवहार को भी महत्वपूर्ण माना।

'महिला की इजाजत के खिलाफ हुई घटना'

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने एफआईआर दर्ज कराई, ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष का समर्थन किया और जमानत का विरोध करने के लिए खुद कोर्ट में पेश हुई। इससे साफ होता है कि घटना उसकी इजाजत के खिलाफ हुई थी।

* HC बोला, दोस्ती या खास दिन का मतलब सहमति नहीं।
* पीड़िता नाबालिग, डीएनए सबूत के आधार पर जमानत खारिज।
* 'लड़की की मांग में इजाजत के बिना सिंदूर भरना भी सही नहीं।

क्या था मामला?

यह मामला 14 फरवरी 2025 का है। 17 साल की पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर एक घर में ले गया, जहां उसने उसकी मांग में सिंदूर भरा और विरोध के बावजूद उसके साथ यौन संबंध बनाए। अभियोजन पक्ष ने ऐसे सबूत पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि पीड़िता नाबालिग थी। पीडिता के शरीर में आरोपी का डीएनए भी मिला।