LPG की किल्लत से दिल्ली में मचा हड़कंप, तीन गुना बढ़ी PNG की मांग, पुराने कनेक्शन दोबारा शुरू कराने वालों की संख्या भी बढ़ी...
केसरी न्यूज 24, ब्यूरो नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में एलपीजी सिलेंडरों की कमी और कालाबाजारी की खबरों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की ओर रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि राजधानी में नए पीएनजी कनेक्शन के लिए मांग अचानक बढ़ गई है और इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) को रोज पहले के मुकाबले कई गुना अधिक कॉल मिल रही हैं।
आईजीएल के अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह तक कंपनी को रोजाना करीब 100 कॉल मिलती थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 300 कॉल प्रतिदिन हो गई है. यानी सिर्फ एक सप्ताह के भीतर मांग करीब तीन गुना हो गई है. कंपनी का कहना है कि गैस की कमी और एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी की खबरों के कारण लोग पीएनजी कनेक्शन लेने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं. कई परिवार अब स्थायी गैस व्यवस्था की तलाश में हैं, इसलिए वे पाइप गैस को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
बढ़ती मांग को संभालने के लिए अतिरिक्त टीमें तैनात
आईजीएल के अधिकारियों ने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने अतिरिक्त टीमों को तैनात किया है. फिलहाल कंपनी दिल्ली में प्रतिदिन 1000 से ज्यादा घरेलू पीएनजी कनेक्शन चालू करने की क्षमता रखती है. कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि जितने भी अनुरोध मिल रहे हैं, उनके आधार पर ज्यादा से ज्यादा नए कनेक्शन लगाने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि लोगों को जल्द से जल्द सुविधा मिल सके।
पुराने कनेक्शन दोबारा शुरू कराने वालों की संख्या भी बढ़ी
आईजीएल के मुताबिक केवल नए कनेक्शन ही नहीं, बल्कि ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या भी बढ़ रही है जो पहले अपना पीएनजी कनेक्शन बंद कर चुके थे और अब उसे फिर से चालू कराना चाहते हैं. पिछले सप्ताह तक कंपनी को रोजाना लगभग 150 से 200 ऐसी कॉल मिलती थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 350 से अधिक हो गई है. इन परिवारों के घरों में पहले से ही पीएनजी का ढांचा मौजूद है, इसलिए वे जल्दी से कनेक्शन दोबारा शुरू कराना चाहते हैं।
उद्योगों के लिए गैस आपूर्ति में 20% तक कटौती
दूसरी ओर, कुछ गैर-घरेलू उपभोक्ताओं का कहना है कि आईजीएल ने गैस आपूर्ति पर 80 प्रतिशत की सीमा लागू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार यह कदम सरकारी निर्देशों के अनुसार उठाया गया है. मुंडका औद्योगिक क्षेत्र कल्याण समिति के उपाध्यक्ष श्रीश शर्मा का कहना है कि इस फैसले से इलाके के करीब 30 से 40 प्रतिशत उद्योग प्रभावित हुए हैं।
उनका कहना है कि आपूर्ति पिछले तीन महीनों की औसत खपत के आधार पर तय की जा रही है. उस समय गैस की खपत कम थी, इसलिए अब जरूरत के समय पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है. उन्होंने बताया कि गैस से चलने वाले जनरेटर इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
उद्योग संगठनों ने जताई चिंता
दिल्ली के प्रमुख व्यापार और उद्योग संगठन ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है और इसका बोझ सीधे घरेलू उद्योगों, खासकर एमएसएमई पर डाला जा रहा है. चैंबर के अनुसार, पिछले कई वर्षों में दिल्ली के उद्योगों ने सरकार के निर्देशों और पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए पारंपरिक ईंधन छोड़कर पीएनजी का इस्तेमाल शुरू किया था. इसके लिए कंपनियों ने काफी निवेश भी किया था।
संगठन के प्रमुख रघुवंश अरोरा का कहना है कि गैस आपूर्ति में अचानक कटौती से कई छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का बड़ा फैसला उद्योग जगत से पर्याप्त चर्चा किए बिना लिया गया है और यह भी साफ नहीं है कि यह व्यवस्था कब तक जारी रहेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैस आपूर्ति की स्थिति जल्दी सामान्य नहीं होती, तो इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों पर भी पड़ सकता है।