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दिल्ली पुलिस ने तीन राज्यों से 4 आतंकी दबोचे, गजवा-ए-हिंद के लिए बम बनाने और युवाओं को भड़काने की रची साजिश...

दिल्ली पुलिस ने तीन राज्यों से 4 आतंकी दबोचे, गजवा-ए-हिंद के लिए बम बनाने और युवाओं को भड़काने की रची साजिश...

नई दिल्ली। एक खुफिया जानकारी पर आधारित ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस ने महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार से चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। इन युवाओं का मानना था कि खुरासान से काली झंडियों वाली एक लश्कर (सेना) का उदय होगा, जो भारतीय उपमहाद्वीप और उससे आगे खिलाफत (इस्लामिक स्टेट) की स्थापना करेगी। वे खुद को इस लश्कर में शामिल होने और गजवा-ए-हिंद में भाग लेने के लिए तैयार कर रहे थे। वे अन्य युवाओं को भी कट्टरपंथी बनाने में लगे हुए थे। एक आरोपी के पास आईईडी बनाने का सामान भी बरामद किया गया है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एनडीआर टीम ने महाराष्ट्र से दो, ओडिशा से एक और बिहार एक कुल चार भ्टके हुए युवाओं को गिरफ्तार किया है। ये सभी खिलाफत की विचारधारा से प्रेरित थे और गजवा-ए-हिंद के लिए तैयारी कर रहे थे।

इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत स्पेशल सेल थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। आईईडी बनाने का सामान बरामद किया गया तथा आरोपियों के मोबाइल डिवाइस जब्त कर लिए गए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम मोसैब अहमद उर्फ सोनू, मोहम्मद हम्माद, शेख आमिर और मोहम्मद सोहैल है। मोसैब और हम्माद महाराष्ट्र के पुणे से जबकि शेख इमरान और सोहैल क्रमश: ओडिशा और बिहार के कटिहार से दबोचे गए हैं।

कैसे कर रहे थे आतंकी काम

आरोपी एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न बंद ग्रुपों के एडमिन या सदस्य थे। वे खिलाफत/इस्लामिक स्टेट की स्थापना के लिए जिहाद के जरिए अन्य युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने में लगे हुए थे।

मॉड्यूल के दो सदस्य लोकल स्तर पर उपलब्ध सामग्री इकट्ठा करके रिमोट कंट्रोल्ड आईईडी बनाने की प्रक्रिया में थे, जिसका इस्तेमाल आतंकवादी हमले के लिए किया जा सकता था।

क्यूआर शेयर कर जमा करवा था फंड

एक सदस्य अन्य सदस्यों को हथियार और विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए उकसा रहा था ताकि वे गजवा-ए-हिंद में भाग ले सकें। उसने अपने सोशल मीडिया चैनल पर जिहाद के समर्थन में भीड़-फंडिंग के लिए अपना बैंक अकाउंट/क्यूआर कोड तक शेयर किया था।

दूसरे सदस्य ने मॉड्यूल के सदस्यों को हथियारों की ट्रेनिंग दिलाने का वादा किया और इसके लिए रुपये भेजने को कहा। दिसंबर 2025 में उसने दिल्ली के रेड फोर्ट समेत कई संवेदनशील स्थानों का दौरा किया और रेड फोर्ट पर काली झंडी लगे फोटो पोस्ट करके अन्य सदस्यों को कट्टर बनाने की कोशिश की।

सबकी अलग-अलग थी जिम्मेदारी, रिमोट वाली कार से बम बना रहा था

मोसैब अहमद उर्फ सोनू उर्फ कलाम : मूलत: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला। 10वीं तक पढ़ाई की। वेल्डर, ऑटो मैकेनिक और ऑटो इलेक्ट्रीशियन के रूप में भारत और विदेश (सऊदी अरब, कतर) में काम किया।

फिलहाल, ठाणे में एक प्राइवेट ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में काम कर रहा था। वह कई ऑनलाइन ग्रुपों का सदस्य था, जहां लश्कर-ए-महदी और जिहाद से संबंधित चर्चाएं होती थीं।

उसने सह-आरोपी मोहम्मद हम्माद को रिमोट कंट्रोल्ड टॉय कार का सर्किट खोलकर आईईडी बनाने में मदद की और उसकी तस्वीर बंद ग्रुप में शेयर की।

12वीं के छात्र ने जुटाए बम के लिए सामान

मोहम्मद हम्माद : मुंबई का निवासी। कॉरेस्पॉन्डेंस से 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। जनवरी 2026 के आस-पास वह एक बंद ग्रुप में शामिल हुआ, जिसमें मोसैब अहमद उर्फ कलाम भी सक्रिय था। ग्रुप में जिहाद और गजवा-ए-हिंद पर चर्चा होती थी।

उसने बॉल बेयरिंग, कीलें, रिमोट कंट्रोल्ड टॉय कार और बॉक्स की तस्वीरें शेयर कीं, जो आईईडी बनाने का सामान थे। उसने ये सामग्री मोसैब अहमद को सौंप दी, जिसे मैकेनिक होने के नाते आईईडी असेंबल करने का काम सौंपा गया था।

तकरीर सुनते-सुनते राह से भटका

शेख इमरान : ओडिशा के भुवनेश्वर में निम्न वर्गीय परिवार में जन्मा। 10वीं तक पढ़ाई की, इसके बाद सिक्योरिटी गार्ड और डिलीवरी बॉय का काम किया। वर्ष 2024 से तारिक जमील, इसरार अहमद, जाकिर नायक आदि के लेक्चर/तकरीर सुनने लगा और धीरे-धीरे कट्टर विचारधारा अपना ली।

सोशल मीडिया के जरिए मोहम्मद हम्माद और मोसैब अहमद से जुड़ा तथा एक बंद ग्रुप बनाया, जिसमें जिहाद, खिलाफत और गजवा-ए-हिंद पर चर्चा होती थी। उसने राम मंदिर, संसद और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की चर्चा की।

दिसंबर 2025 में रेड फोर्ट और इंडिया गेट की रेकी के लिए दिल्ली आया। उसने सदस्यों को ओडिशा में हथियार और घुड़सवारी समेत शारीरिक प्रशिक्षण दिलाने का वादा किया और इसके लिए फंड जमा करने को कहा।

जांच में यह भी पता चला कि आरोपी शेख इमरान ने दिसंबर 2025 में दिल्ली के संवेदनशील इलाकों का दौरा किया था। उसने लाल किले की एक फोटो इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसमें एडिटिंग के जरिए किले के ऊपर 'काला झंडा' दिखाया गया था, ताकि अन्य युवाओं को कट्टरपंथी बनाया जा सके।

सोशल मीडिया से युवाओं को जोड़ा

मोहम्मद सोहैल : बिहार के कटिहार का निवासी। प्लंबर का काम करता है। 10वीं तक पढ़ाई की। डॉ. इसरार अहमद की तकरीरों से प्रभावित हुआ। उसने कई सोशल मीडिया अकाउंट बनाए और जिहाद के नाम पर युवाओं को उकसाया।

मार्च 2026 में उसने अपने चैनल के फॉलोअर्स को गजवा-ए-हिंद के लिए हथियार और विस्फोटक इकट्ठा करने के लिए भड़काया। जिहाद के नाम पर पैसे जमा करने के लिए अपना बैंक अकाउंट/क्यूआर कोड शेयर किया।