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क्या सरोजिनी मार्केट में 'मरे हुए लोगों' के बिकते हैं कपड़े? जानें कहां से आता है ये स्टॉक, सच्चाई जानकर आप पकड़ लेंगे अपना माथा...

क्या सरोजिनी मार्केट में 'मरे हुए लोगों' के बिकते हैं कपड़े? जानें कहां से आता है ये स्टॉक, सच्चाई जानकर आप पकड़ लेंगे अपना माथा...

लाइफस्टाइल डेस्क। दिल्ली का सरोजिनी नगर मार्केट (Sarojini Nagar Market) न केवल राजधानी बल्कि पूरे देश की लड़कियों और फैशन लवर्स का पसंदीदा अड्डा है। ₹100 से ₹200 में ट्रेंडी टॉप्स और ब्रांडेड जींस मिलने के कारण इसे 'शॉपिंग का स्वर्ग' कहा जाता है। लेकिन इसी सस्तेपन के साथ एक खौफनाक अफवाह भी सालों से जुड़ी हुई है क्या यहाँ मरे हुए लोगों के कपड़े बिकते हैं?

सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि ये कपड़े विदेशों के श्मशान या कब्रिस्तानों से लाए जाते हैं। आइए जानते हैं इस दावे के पीछे की सच्चाई और इन कपड़ों का असली सोर्स।

क्यों उड़ती है 'डेड पीपुल्स क्लॉथ्स' की अफवाह?

इंटरनेट पर कई वीडियो और ब्लॉग्स में यह दावा किया जाता है कि अमेरिका, कनाडा और यूरोप जैसे देशों में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उनके कपड़े दान कर दिए जाते हैं।

अफवाह फैलाने वालों का कहना है कि इन्हीं 'इस्तेमाल किए हुए' कपड़ों को कंटेनरों में भरकर भारत लाया जाता है और सरोजिनी नगर की पटरियों पर सजा दिया जाता है। इसी कारण इन्हें 'श्मशान के कपड़े' भी कहा जाने लगा।

क्या है हकीकत? (The Reality Check)

तमाम फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स और बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, यह दावा पूरी तरह से गलत और निराधार है। सरोजिनी नगर में मरे हुए लोगों के कपड़े बेचे जाने का कोई भी ठोस प्रमाण आज तक नहीं मिला है। यह महज एक शहरी किंवदंती (Urban Legend) है जो सस्ते दाम होने की वजह से पैदा हुई है।

इतने सस्ते कपड़े आखिर आते कहाँ से हैं?

अगर ये मरे हुए लोगों के कपड़े नहीं हैं, तो इतने सस्ते क्यों हैं? इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं-

एक्सपोर्ट सरप्लस (Export Surplus)

भारत दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा निर्यातकों में से एक है। ZARA और H&M जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स भारत में कपड़े बनवाते हैं। निर्माण के दौरान यदि किसी कपड़े में माइनर डिफेक्ट (जैसे सिलाई में हल्की टेढ़ी लाइन, बटन का थोड़ा इधर-उधर होना या कलर शेड में मामूली फर्क) रह जाता है, तो ब्रांड उसे रिजेक्ट कर देते हैं। ये बिल्कुल नए कपड़े होते हैं जो बेहद सस्ते दाम पर लोकल मार्केट में आ जाते हैं।

अनसोल्ड स्टॉक (Unsold Stock)

जब फैशन सीजन बदलता है, तो फैक्ट्रियों और बड़े शोरूम्स के पास भारी मात्रा में स्टॉक बच जाता है। इस 'अनसोल्ड स्टॉक' को थोक के भाव पानीपत या रघुबीर नगर जैसे बड़े गोदामों में बेच दिया जाता है, जहाँ से ये सरोजिनी नगर पहुँचते हैं।

सेकंड-हैंड और डोनेशन

यह सच है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा सेकंड-हैंड कपड़ों का आयातक है। विदेशों में लोग कपड़े चंद बार पहनकर चैरिटी में दान कर देते हैं। ये कपड़े 'मरे हुए' लोगों के नहीं बल्कि जीवित लोगों द्वारा डोनेट किए गए होते हैं, जिन्हें रिसाइकिल या रीसेल किया जाता है।

खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

चूंकि सरोजिनी नगर में मिक्स स्टॉक आता है, इसलिए स्मार्ट शॉपिंग के लिए ये टिप्स अपनाएं-

बारीकी से जांचें - सिलाई, बटन और चेन को ठीक से चेक करें।

धोकर पहनें - भले ही कपड़े नए दिखें, लेकिन इन्हें घर लाकर गर्म पानी और कीटाणुनाशक (जैसे डेटॉल) से धोना बेहद जरूरी है।

साइज का ध्यान - यहां ट्रायल रूम नहीं होते, इसलिए अपना साइज पहले से नाप कर जाएं।

सरोजिनी नगर में शॉपिंग करते समय डरने की जरूरत नहीं है। बस अपनी पारखी नजर साथ रखें और इस अफवाह को सिरे से खारिज कर दें।