कौन हैं ये महिला, जिनके सामने पीएम मोदी ने जोड़े हाथ, किस ओर जा रहा है बंगाल चुनाव का दूसरा फेज?...
कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर पहुंचकर मतुआ समुदाय के सबसे बड़े धार्मिक स्थल, मतुआ ठाकुर मंदिर में दर्शन और पूजन किया। मंदिर की सीढ़ियों पर मत्था टेकने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर मंदिर की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी और श्री श्री गुरुचंद ठाकुर जी के आदर्श हमारे समाज को निरंतर आलोकित करते रहे हैं।
पीएम मोदी ने मतुआ समुदाय की परम पूजनीय और आध्यात्मिक जननी 'बड़ो मां' यानी वीणापाणि देवी के दर्शन किए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस तस्वीर में पीएम मोदी जिस महिला के सामने अत्यंत विनम्र भाव से हाथ जोड़े बैठे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि मतुआ महासंघ की मुख्य संरक्षक 'बड़ो मां' वीणापाणि देवी हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से पहले 'सियासत के सुपर संडे' ने राज्य में चुनावी हलचल को चरम पर पहुंचा दिया। मतुआ समुदाय, जो बंगाल की करीब 40 से 50 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है, के बीच पीएम मोदी का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने मतुआ समाज के साथ अपने पुराने रिश्तों को याद करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार इस समुदाय के 'नागरिकता' और 'सम्मान' के अधिकार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने मतुआ नमशूद्र समुदाय के लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा, 'मैं आज ठाकुरनगर की इस पवित्र धरती से संकल्प लेता हूं कि मतुआ समुदाय के हर पात्र सदस्य को सीएए के जरिए भारत की नागरिकता दी जाएगी।'
कौन हैं मतुआ समुदाय से ताल्लुक रखने वाली ये बुजुर्ग महिला?
मतुआ मंदिर की तस्वीरों और मोदी के 'नागरिकता संकल्प' ने बंगाल के चुनावी समर में एक नई ऊर्जा भर दी है। जहां टीएमसी इसे चुनावी स्टंट बता रही है, वहीं मतुआ समाज के बीच मोदी की इस यात्रा को उनके 'अस्तित्व और अधिकार' की लड़ाई से जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने इस यात्रा के दौरान स्वयं याद किया कि कैसे कुछ साल पहले उन्हें बड़ो मां का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला था। मतुआ समुदाय के लिए बड़ो मां केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक दैवीय अवतार थीं. साल 2019 में उनके निधन के बाद भी उनका प्रभाव मतुआ मतदाताओं पर अटूट है।
मतुआ समाज और बीजेपी का रिश्ता
पीएम मोदी का उनके सामने नतमस्तक होना मतुआ समुदाय के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक मतुआ समाज के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की एक सफल कोशिश मानते हैं। पीएम मोदी इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी मतुआ मंदिर गए थे।
'चुनावी मोहरा' बनाने का आरोप
ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा शरणार्थियों को केवल एक 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल किया है। उन्होंने 'नागरिकता' और 'पहचान' के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए कहा कि दीदी ने शरणार्थियों को डराया है, जबकि बीजेपी उन्हें उनका जायज हक और सम्मान देने आई है। ठाकुरनगर में उमड़ा जनसैलाब इस बात की तस्दीक कर रहा था कि नागरिकता का मुद्दा इस बार भी बंगाल चुनाव में एक बड़ा गेमचेंजर साबित होने वाला है।
मतुआ मंदिर में पीएम मोदी का यह दर्शन और पूजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश भी है। बड़ो मां के प्रति उनकी श्रद्धा ने मतुआ समुदाय के भीतर बीजेपी के प्रति भरोसे को और मजबूत किया है। अब देखना यह है कि क्या 10 रुपये की झालमुड़ी से शुरू हुई यह 'सांस्कृतिक पॉलिटिक्स' और बड़ो मां का यह आशीर्वाद 4 मई को बीजेपी के लिए सत्ता की राह आसान करेगा।