भारत के लिए आई बड़ी खुशखबरी, न्यूजीलैंड के साथ डील के बाद सस्ती हो जाएंगी ये चीजें, देखें पूरी लिस्ट...
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत न्यूजीलैंड ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर नए युग की शुरुआत कर दी है. महज नौ महीनों में तैयार हुआ यह समझौता दोनों देशों की मजबूत कूटनीतिक इच्छाशक्ति आर्थिक सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है.इस समझौते पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।
साझेदारी का नया आयाम
यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो लोकतांत्रिक देशों के बीच गहरे दीर्घकालिक संबंधों की नींव रखता है. इसे 'पीढ़ी में एक बार' होने वाला अवसर बताया जा रहा है. इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करना है।
व्यापार निवेश का विस्तृत खाका
इस एफटीए के तहत न्यूजीलैंड अपने बाजारों में भारतीय उत्पादों को पूरी तरह शुल्क-मुक्त प्रवेश देगा. पहले जहां कई वस्तुओं पर 10 फीसदी तक शुल्क लगता था, अब वह खत्म हो जाएगा. वहीं भारत भी न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 95% उत्पादों पर शुल्क में बड़ी कटौती करेगा।
इससे भारतीय निर्यातकों खासकर कपड़ा, चमड़ा, कालीन ऑटो पार्ट्स उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा. साथ ही न्यूजीलैंड के ऊन, लकड़ी, समुद्री उत्पाद प्रीमियम फलों को भारतीय बाजार में नई पहचान मिलेगी।
रोजगार शिक्षा के नए अवसर
यह समझौता रोजगार शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा. हर साल 5,000 भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड में काम करने का अवसर मिलेगा. आईटी, इंजीनियरिंग, आयुष योग जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को तीन साल का वर्क वीजा दिया जाएगा।
इसके अलावा 'वर्किंग हॉलिडे वीजा' के तहत 1,000 भारतीय युवाओं को एक साल तक न्यूजीलैंड में काम यात्रा का मौका मिलेगा. इससे युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव के नए रास्ते खुलेंगे।
क्या होगा सस्ता?
इस समझौते के बाद भारतीय उपभोक्ताओं को कई उत्पाद सस्ते दामों पर मिल सकते हैं।
- कीवी, सेब, चेरी एवोकैडो जैसे फल सस्ते होंगे।
- सैल्मन मसल्स जैसे समुद्री उत्पादों की कीमत घटेगी।
- ऊन लकड़ी सस्ती होने से कपड़े फर्नीचर के दाम कम हो सकते हैं।
- मनुका शहद शिशु आहार जैसे प्रीमियम उत्पाद भी किफायती होंगे।
हालांकि, भारत ने डेयरी, चीनी, मसाले खाद्य तेल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखकर किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
वैश्विक स्तर पर रणनीतिक महत्व
यह एफटीए वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा. साथ ही न्यूजीलैंड के निवेशकों के लिए 1.4 अरब आबादी वाले बाजार में प्रवेश का सुनहरा मौका है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल आर्थिक सहयोग का दस्तावेज नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी का रोडमैप है. यह समझौता व्यापार, निवेश, रोजगार शिक्षा के नए अवसर पैदा करेगा दोनों देशों को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाएगा।