वाराणसी क्राइम न्यूज :: दोना-पत्तल कारोबारी मनीष सिंह हत्याकांड ने लिया जातीय संघर्ष का रूप, गांव में फोर्स तैनात, दो अरेस्ट बाकी तलाश जारी...
वाराणसी, ब्यूरो। यूपी के वाराणसी में रविवार की रात भरथरा गांव की दुखद घटना जातीय राजनीति का शिकार हो गई है। प्रशासन भी इस पूरे मामले पर बहुत संभल कर अपनी कार्रवाई कर रही है।दोना पत्तल व्यवसायी मनीष सिंह की कार से भरथरा गांव की एक महिला को धक्का लग गया था जिसके बाद मनबढ़ ग्रामीणों ने मनीष सिंह की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।
मनीष सिंह के चाचा अरुण सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। तहरीर के मुताबिक, रंजिशन मनीष सिंह की हत्या की गई है। मनीष सिंह के ठाकुर बिरादरी के होने की वजह से अब मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रंग लेने लगा है। सोशल मीडिया पर मनीष सिंह के समर्थन में लगातार लोग पोस्ट कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
रविवार की रात मनीष सिंह अपने फैक्ट्री से निकले घमघापुर गांव पार करते समय मनीष की कार से एक महिला को धक्का लग गया। इसके बाद ग्रामीणों ने कार चला रहे मनीष सिंह की पीट-पीट कर हत्या कर दी। इस मामले में 8 नामजद समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा लिखा है। इसी केस में एक आरोपी को पकड़ने खालिसपुर sog की टीम पहुंची। टीम ने एक संदिग्ध को पकड़ लिया लेकिन सिविल ड्रेस में होने की वजह से ग्रामीणों ने पुलिस को नही पहचाना। इसके बाद गाँव मे स्थिति तनावपूर्ण हो गयी।
बंधक बनाए गए दो पुलिसकर्मियों को छुड़ाया गया
दबिश देने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दो पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया। किसी तरह से अन्य सदस्य भाग कर पुलिस के बड़े अधिकारियों के पास पहुंचे। इसके बाद फूलपुर थाना की फोर्स ने ग्रामीणों के चंगुल से किसी तरह दोनों पुलिसकर्मियों को छुड़ाया।
हरिश्चंद्र और योगेंद्र प्रजापति अरेस्ट
मनबढ़ ग्रामीणों की तरफ से मनीष सिंह की हत्या के बाद पुलिसकर्मियों को बंधक बनाने की घटना ने प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद कमिश्नरेट के आला अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ गांव में कैंप किया और स्थिति की निगरानी की। पुलिस उपायुक्त कार्यालय ने बताया कि हरिश्चंद्र और योगेंद्र प्रजापति नाम के दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की तलाश में छापेमारी की जा रही है।
सोशल मीडिया पर अगड़ा-पिछड़ा की बहस तेज
इस मामले में 8 नामजद में सभी ओबीसी समुदाय के लोग हैं। इसके अलावा इस पूरे गांव में पिछड़ों की संख्या ज्यादा है। मनीष सिंह के अगड़े जाति का होने की वजह से अब सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। बनारस के कई बड़े बुद्धिजीवी इसे जातीय एंगल से देख रहे हैं और कह रहे हैं कि ओबीसी वोट के चक्कर में अब अगड़ों को त्याग दिया गया है।