इंतजार खत्म अब पीएम करेंगे नए मालवीय ब्रिज का शिलान्यास, जान लें इस अनोखे रेल वह यात्री वाहनों वाले सिग्नेचर पुल की विशेषता...
वाराणसी, ब्यूरो। आज काफी मशक्कत के बाद आखिरकार नए रेल और यात्री वाहनों के यातायात को सुगम बनाने के लिए गंगा में पुल को धरातल मिलने जा रहा है। पीएम मोदी अब इसका शिलान्यास करेंगे। लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मालवीय ब्रिज का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। यह अवसर साढ़े तीन वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आया है।
अब आगे कोई बाधा नहीं आने वाली है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2029 में नया राजघाट पुल, जिसे मालवीय ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है, जनता की सेवा में समर्पित होगा। नार्दन रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडेय ने 12 मार्च को निरीक्षण के दौरान इस बात के संकेत दिए थे। पुल निर्माण के लिए मिट्टी की जांच का कार्य पूरा किया जा चुका है।
पूरा होने के बाद कुछ इस तरह नजर आएगा नया मालवीय पुल।
ब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी रेलवे की आरवीएनएल और जीपीटी इंफ्रा प्रोजेक्ट के ज्वाइंट वेंचर को सौंपी गई है, जिसने पुल निर्माण की गति को तेज कर दिया है। नया मालवीय ब्रिज 11 पिलर पर आधारित होगा, जिसमें गंगा के दोनों किनारों पर एक-एक पिलर होगा। कुल मिलाकर, इस पुल में 13 पिलर होंगे।
नए मालवीय ब्रिज की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- यह 06 लेन की सड़क होगी।
- इसमें 04 रेलवे ट्रैक होंगे।
- कुल लंबाई 1,074 मीटर होगी।
- ट्रेनों की गति 112 किमी प्रति घंटा होगी।
- मुख्य पुल का हिस्सा 11 पिलर पर खड़ा होगा।
पुराना मालवीय पुल सौ वर्ष से अधिक समय तक सेवा दे चुका है।
इस परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि जुलाई 2023 में गंगा ब्रिज पर छह लेन की सड़क और चार रेलवे ट्रैक की डिजाइन को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद, मार्च 2024 में आइआइटी रुड़की और बीएचयू के इंजीनियरों ने सुरक्षा के लिए एनओसी प्रदान की। जून 2024 में पुरातत्व विभाग ने परियोजना को अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया। अंततः, अक्टूबर 2024 में कैबिनेट से इस परियोजना को मंजूरी मिली थी।
नया मालवीय ब्रिज वाराणसी के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। यह पुल न केवल यातायात की सुविधा को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी योगदान देगा। पुल के निर्माण से गंगा नदी के दोनों किनारों के बीच संपर्क में सुधार होगा, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए यात्रा करना आसान हो जाएगा।
पुराने पुल को बनाने के बाद अब लगभग 140 साल बाद नया पुल बनने जा रहा है।
इस परियोजना के तहत, पुल का डिज़ाइन आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए तैयार किया गया है, जो इसे न केवल मजबूत बनाएगा, बल्कि दीर्घकालिक उपयोग के लिए भी उपयुक्त होगा। इसके अलावा, यह पुल पर्यावरण के अनुकूल निर्माण विधियों का पालन करते हुए बनाया जाएगा, जिससे प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। पुराने पुल का नाम डफरिन ब्रिज था जिसे बाद में मालवीय पुल (राजघाट) के नाम से जाना जाने लगा।
अब नए पुल का नाम भी मालवीय पुल भी होगा।नया मालवीय ब्रिज वाराणसी की पहचान को और मजबूत करेगा और इसे एक प्रमुख परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। इसके निर्माण से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस प्रकार, मालवीय ब्रिज का निर्माण न केवल एक भौतिक संरचना है, बल्कि यह वाराणसी के विकास और समृद्धि का प्रतीक भी है। सभी की निगाहें अब इस महत्वपूर्ण परियोजना की प्रगति पर हैं, और उम्मीद की जा रही है कि यह समय पर पूरा होगा।
इस पुल के निर्माण से वाराणसी की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और यह क्षेत्र के विकास में एक नई दिशा प्रदान करेगा। हालांकि पुराना पुल 1887 में बना था, जबकि उसका पहला स्केच 1890 में जारी किया गया था। अब नया पुल बनने के बाद बिहार-बंगाल से कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी और ट्रेनों को गति भी मिलेगी। हाई स्पीड ट्रेनों को इस पुल से ही गति देने की तैयारी है। अब ट्रेनों को आउटर पर खड़े होकर रूट क्लियर होने का इंतजार भी नहीं करना होगा।