नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ फूटा गुस्सा... भारत से आ रहे चिप्स और बिस्कुट के पैकेट भी किए जा रहे जब्त, हर तरफ भड़के लोग...
काठमांडू। नेपाल में भारतीय सामानों पर कस्टम ड्यूटी पर सख्ती किए जाने के बाद कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। भारत के 100 रुपये से ज्यादा के सामानों पर कस्टम ड्यूटी लागू कर दिए गये हैं।
हालांकि ये नियम 2023 का है लेकिन बालेन शाह की सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। ऐसे में नेपाल के वो लोग जो दवाएं, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और शादी का सामान खरीदने सीमावर्ती भारतीय इलाकों में आते हैं उन्हें बड़ा झटका लगा है। बॉर्डर पार करते समय सख्त चेकिंग हो रही है और हैरानी की बात ये है कि चिप्स और बिस्किट के पैकेट भी जब्त किए जा रहे हैं।
बालेन शाह सरकार के इस फैसले के खिलाफ सीमावर्ती जिलों में प्रदर्शन शुरू हो गया है। दरअसल नेपाल के लोगों के लिए भारतीय सामान उनके अपने देश में मिलने वाले सामान के मुकाबले सस्ता होता है। लेकिन अब सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नेपाल के लोग बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत-नेपाल सीमा दुनिया की सबसे खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक है।
नेपाल के सीमावर्ती जिलों में कस्टम ड्यूटी के खिलाफ प्रदर्शन
नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भारत से आयात किए जाने वाले 100 नेपाली रुपये यानी 63 भारतीय रुपये से ज्यादा कीमत के सामान पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लगा दी है। बताया जा रहा है कि सामान के प्रकार के आधार पर यह कस्टम ड्यूटी 5% से लेकर 80% तक हो सकती है। नेपाल और भारत की सीमा पर हर दिन हजारों लोग आवाजाही करते हैं ऐसे में सामानों की तलाशी में लोगों को घंटों तक लाइन में लगा रहना पड़ता है जिससे लोगों का गुस्सा भड़का हुआ है।
ANI ऑनलाइन से बात करते हुए नेपाल प्लानिंग कमीशन के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. गोविंद पोखरेल ने कहा है कि 'ये नियम 2023 में बनाया गया था जिसे अब सख्ती से लागू किया गया है। लेकिन 100 रुपये की सीमा रेखा रखना गलत है। इससे दिहाड़ी मजदूरों पर सीधा असर पड़ता है। इसी सीमा को बढ़ाकर कम से कम 1000 रुपये किया जाना चाहिए क्योंकि आजकल 100 रुपये में क्या ही आता है।'
प्रदर्शनकारियों में से एक ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया 'यहा नेपाल में जन्म से लेकर मृत्यु तक होने वाले रीति-रिवाजों के लिए हम सभी जरूरी चीजें वहां (भारत) से लाते हैं। यहां तक कि खाद भी जिसे नेपाल सरकार कभी-कभी समय पर उपलब्ध नहीं करा पाती, उसे हम भारत से ही मंगाते हैं। अब हालात बदल गए हैं। यह एक अघोषित नाकेबंदी है।'
बीरगंज और काठमांडू में लोगों का प्रदर्शन
ये विरोध प्रदर्शन नेपाल के सीमावर्ती शहर बीरगंज और राजधानी काठमांडू में हुए हैं। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नेपाली निवासियों ने कहा कि इस कदम से 'उनकी ज़िंदगी पर सीधा असर पड़ेगा' क्योंकि वे 'रोजमर्रा की चीजों के लिए सीमा पार से खरीदारी पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं।' प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस फैसले से आर्थिक बोझ काफी ज्यादा बढ़ गया है। नेपाली नागरिकों के नेपाल के सुरक्षा और कस्टम अधिकारियों के साथ भारत से सामान लाने-ले जाने को लेकर बहस करते हुए वीडियो सामने आ रहे हैं।
इसके अलावा भारतीय दुकानदार, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी ड्राइवर नेपाल से आने वाले लोगों की भारी भीड़ की वजह से अपनी कमाई करते थे और अब बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से कस्टम ड्यूटी को सख्ती से लागू किए जाने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बाजारों में आने वाले लोगों की संख्या में कथित तौर पर भारी गिरावट आई है। राष्ट्रीय एकता दल के अध्यक्ष बिनय यादव ने नेपाल सरकार के इस कदम को "अघोषित नाकेबंदी" बताया।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उन्होंने कहा "यह कदम 1950 की शांति और मैत्री संधि के प्रावधानों के खिलाफ है। सरकार को घरेलू सामानों पर लगी कस्टम सीमा को तुरंत हटा देना चाहिए और सुरक्षाकर्मियों को निर्देश देना चाहिए कि वे नागरिकों के साथ मित्रवत व्यवहार करें।"