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'तेल साफ करने वाली रिफाइनरियों पर हुए गुप्त हमले'...भारत-पाकिस्तान से अमेरिका तक लगी आग, ये संयोग है या साजिश? जानें...

'तेल साफ करने वाली रिफाइनरियों पर हुए गुप्त हमले'...भारत-पाकिस्तान से अमेरिका तक लगी आग, ये संयोग है या साजिश? जानें...

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत से बीते 57 दिनों में भारत, अमेरिका, पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया की कच्चा तेल साफ करने वाली 11 रिफाइनरियों में अचानक आग लगने, विस्फोट या लीक होने जैसी घटनाएं हुई हैं। इन्हीं में से एक राजस्थान में बालोतरा के पचपदरा रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, जहां हाल ही में आग लग गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रिफाइनरी का 21 अप्रैल को उद्घाटन करने वाले थे, मगर उससे एक दिन पहले ही यानी 20 अप्रैल को आग लगने की घटना हो गई, जिसके बाद पीएम का दौरा टाल दिया गया। 

मामले की जांच की जा रही है। देश और दुनिया की इन रिफाइनरियों को लेकर हुई घटनाओं से साजिश थ्योरी को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर कई एक्सपर्ट भी इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पूरी बात समझते हैं।

भारत समेत दुनिया भर की रिफाइनरियों पर खतरा?

* रिफाइनरी की सबसे ताजा घटना पाकिस्तान की नेशनल रिफाइनरी लिमिटेड से जुड़ी है। 
* पाकिस्तान की नेशनल रिफाइनरी लिमिटेड की दक्षिण पश्चिमी बलूचिस्तान स्थित दारिग्वान साइट पर एक अज्ञात बंदूकधारी ने हमला कर दिया। 
* इसके बाद इस साइट पर सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन चलाकर इस सुरक्षित किया। कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
* सोशल मीडिया पर अमेरिका-ईरान युद्ध पर करीब से नजर रखने वाले एक एक्सपर्ट ने कहा-28 फरवरी से अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा हुआ है, जिससे पूरी दुनिया में एनर्जी संकट पैदा हो गया है। 
* रिफाइनरियों के साथ हुई दुर्घटनाओं को लेकर टाइमिंग को समझते हैं।
रिफाइनरियों से जुड़ी घटनाओं की टाइमिंग समझिए

* इक्वाडोर की सबसे बड़ी रिफाइनरी में बीते नौ महीने में तीसरी बार आग लगने की घटना हुई।
ऑस्ट्रेलिया की वीवा एनर्जी गीलॉन्ग में विस्फोट हो गया, जिससे देश की 10 फीसदी ईंधन आपूर्ति पर खतरा पैदा हो गया।
* रूस की निझनेकामस्कनेफ्तखिम प्लांट में विस्फोट हो गया, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई।
* भारत की ओएनजीसी की मुंबई हाई अपतटीय में आग लग गई, जिसमें 10 वर्करों की मौत हो गई।
* अमेरिका की वालेरो पोर्ट ऑर्थर टेक्सास रिफाइनरी में 1,57,000 पाउंड केमिकल बह गया, जिससे 10 दिनों तक आसमान में धुआं उठता रहा।
* भारत में राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में अचानक आग लग गई, जब पीएम मोदी इसका उद‌घाटन करने वाले थे।

न मिसाइल न ड्रोन, रिफाइनरियों के साथ एक्सीडेंट

एक्सपर्ट ने कहा-चार महाद्वीपों में कोई मिसाइल नहीं, कोई ड्रोन नहीं, महज एक्सीडेंट हुआ, वो भी तब जब दुनिया मिडिल ईस्ट सप्लाई का विकल्प तलाश रही है। ऐसे में यह एक तरह का गुप्त हमले हैं, जिसे ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स पर दबाव बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। देशों को मजबूर किया जा रहा है कि वो युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दें।

किसे हो सकता है इसका बड़ा फायदा

* एक्सपर्ट का कहना है कि अगर हर चीज की कीमत बढ़ती रही, तो सरकारों के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। असली फायदे साफ हैं:
अमेरिका रिकॉर्ड मात्रा में तेल और गैस बेच रहा है।
* इजरायल ज्यादा देशों को सैन्य बोझ बांटने के लिए राजी कर रहा है।
* संयोग एक बात है। चार महाद्वीपों में 45 दिनों के भीतर छह रिफाइनरियों में ऐसी घटनाएं होना एक पैटर्न है।

दुनिया की एनर्जी ग्रिड को पहुंचाया जा रहा नुकसान?

* सोशल मीडिया एक्स पर इसे संयोग या साजिश का नाम दिया जा रहा है। एक एक्सपर्ट ने दावा किया-अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से 20 से ज्यादा रिफाइनरियों पर हमले, अचानक आग लगने या खराब होने की घटनाएं हुई हैं।
* दुनिया की एनर्जी ग्रिड को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इनमें अमेरिका की वालेरो, ऑस्ट्रेलिया की गीलॉन्ग, रूस की सिबूर और भारत की पचपदरा रिफाइनरी शामिल रही हैं। 
* ये घटनाएं तब हुई हैं, जब अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच दुनिया के 20 फीसदी सप्लाई वाली लाइफलाइन होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही बाधित हो गई है।

अमेरिका-ईरान के साथ छिड़ा है एक और रिफाइनरी वॉर

* यह 2030 World Economic Forum के एजेंडे को लागू करने के लिए ऊर्जा संप्रभुता का सुनियोजित हनन है। हमारे पास तेल का भंडार है, लेकिन वे डिजिटल राशनिंग और केंद्रीय नियंत्रण लागू करने के लिए 'ईंधन की कमी' पैदा कर रहे हैं। 
* ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने देश को 'आने वाले महीनों में बहुत कठिनाइयों' की वॉर्निंग दी है। हालांकि, यह तकलीफ स्थायी होने के लिए रची गई है।
* वहीं, एक भारतीय एक्सपर्ट ने कहा है कि ईरान युद्ध ने एनर्जी को हिलाकर रख दिया है। इस युद्ध के समानांतर रिफाइनरी वॉर भी छिड़ा हुआ है। यह एक लहर की तरह है।
* यूक्रेन ने रूसी तेल ठिकानों पर हमले करने शुरू करने का ऐलान किया। टेक्सास, भारत और ऑस्ट्रेलिया तक इसके पीछे छिपा हुआ एजेंडा है। यह एक साइबर लेयर है।
यह साजिश से ज्यादा 'इंजीनियरिंग' है

* वहीं, एक रिसर्च और एनालिसिस साइट ने पोस्ट में कहा है 28 फरवरी से अब तक 11 रिफाइनरियों में आग लग चुकी है। इंटरनेट पर आधे लोग मानते हैं कि यह सुनियोजित साजिश है। रूस में लगी आग यूक्रेनी ड्रोन हमले हैं। बाकी सब कुछ सरल है।
* ऑस्ट्रेलिया की जिलॉन्ग रिफाइनरी 1950 के दशक की है और उन्होंने स्वीकार किया है कि मार्च में उन्होंने उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए रखरखाव को टाल दिया था। यह देश की बची हुई दो रिफाइनरियों में से एक है और होर्मुज द्वारा आयात मार्ग बंद करने के कारण यह पूरी क्षमता से चल रही थी।
* भारत, टेक्सास और रोमानिया में भी यही स्थिति है। जब होर्मुज स्ट्रेट की 6 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता कम हो जाती है, तो बची हुई हर रिफाइनरी अपनी निर्धारित सीमा से अधिक काम करती है। टाला गया रखरखाव, अधिकतम उत्पादन क्षमता, पुराने उपकरण, कोई गुंजाइश नहीं।
* इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का कहना है कि अकेले मार्च में वैश्विक तेल भंडार 85 मिलियन बैरल कम हो गया। यह तोड़फोड़ नहीं है। बफर खत्म होने पर ऊर्जा प्रणाली ऐसी ही दिखती है। इसके पीछे साजिश से ज्यादा इंजीनियरिंग है, जो बेहद दिलचस्प है।
लेख वह लेखक :: केसरी न्यूज 24 
(ए के केसरी) ।।