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जांच में पुष्टि के बाद भी वाराणसी में भगवान  शंकर के नाम 24 एकड़ जमीन पर नहीं लिया गया कब्जा, मुआवजे की वसूली भी है लंबित...

जांच में पुष्टि के बाद भी वाराणसी में भगवान शंकर के नाम 24 एकड़ जमीन पर नहीं लिया गया कब्जा, मुआवजे की वसूली भी है लंबित...

वाराणसी। भगवान शंकर का मंदिर और 24 एकड़ जमीन तहसील पिंडरा के चिलबिला व दीनापुर ग्रामसभा में है। इसके सरवराकार (प्रबंधक) के वारिसों ने लबे रोड जमीन अपने नाम वरासत करा ली। जब बड़ागांव-कपसेठी मार्ग चौड़ीकरण होने लगा तो लाखों रुपये मुआवजा भी हासिल कर लिया।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच के बाद जमीन भगवान शंकर के नाम की निकली। जमीन से अवैध कब्जेदारों को नाम काटकर पुन: शंकर जी का नाम दर्ज कर लिया गया। जब मीडिया व प्रेस ने बीते दिसंबर में इसे जोर शोर से प्रकाशित किया था तो जिलाधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए पीडब्ल्यूडी से सड़क का मुआवजा वसूली करने का आदेश दिया था। लेकिन बावजूद पीडब्ल्यूडी व एसएलओ ने कोई जवाब नहीं दिया। इतना ही नहीं राजस्व विभाग ने कब्जा भी नहीं लिया।

बाबतपुर-कपसेठी मार्ग पर ग्राम चिलबिला व दीनापुर की सीमा पर एक स्थान पर कई आराजी नंबर में भगवान शिव के नाम कुल 24 एकड़ भूमि है। चिलबिला के जवाहिर व मोतीराम ने एसडीएम पिंडरा से शिकायत किया कि भगवान शिव के नाम की जमीन के सरवराकार (प्रबंधक) के रूप में महेन्द्र गिरी चेला भगवान गिरी का नाम अंकित था।

महेंद्र गिरी की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों ने 1995 में राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से तथ्यों को छिपाकर अपने नाम वरासत कराकर भू-स्वामी बन गए। लगभग एक दशक पूर्व जब बाबतपुर-कपसेठी मार्ग चौड़ीकरण हुआ तो इन फर्जी भू-स्वामियों ने लाखों रुपये भगवान शिव के हिस्से का मुआवजा भी ले लिए। बाद में जवाहिर आदि शिकायतकर्ताओं ने एसडीएम पिंडरा के न्यायालय में 2021 में तजबीजसानी (रेस्टोरेशन) दाखिल किया।

दस्तावेजों की जांच में भूमि भगवान शिव के नाम निकली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद नायब तहसीलदार ने रेस्टोरेशन शिकायत सही पाया और दिसंबर 2025 में दस्तावेजों से सभी के नाम काटकर एक बार फिर भगवान शिव का नाम दर्ज कर दिया गया। मुकदमें में भगवान शिव का पक्ष रखते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व अशोक कुमार वर्मा ने अपना तर्क दिया था के देवता की संपत्ति अपरिवर्तनीय होती है क्योंकि संपत्ति देवता को समर्पित होती है। महंत-पुजारी धार्मिक संपत्ति का केवल ट्रस्टी-प्रबंधक होता है। देवता एक जूरिस्टिक पर्सन हैं।

उनकी संपत्ति की न्यायिक सुरक्षा जिला जज व प्रशासनिक सुरक्षा जिलाधिकारी के पास होती है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने एक बार फिर पीडब्ल्यूडी को पत्र भेज कर पूछा है कि इस मामले में आख्या क्यों नहीं दी गई। यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। हम कार्यालय समय में इस संबंध में ही देख सकूंगा। मामला क्या है।
-आनंद मोहन उपाध्यया-एसएलओ।

अवैध लोगों का नाम काटकर भगवान शिव का नाम दर्ज करने के आदेश का मामला हमें याद नहीं आ रहा है। मैं अभी बाहर हूं। फाइल देखकर ही बता पाउंगी।
-प्रतिभा मिश्रा, एसडीएम पिंडरा।