काशी के इन घाटों पर मंडरा रहा मौत का खतरा ! तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं थम रही डूबने की घटनाएं...
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 84 घाटों से गुजरने वाली गंगा नदी में स्नान करने के लिए देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। अनेक धार्मिक मान्यताएं शहर से जुड़ी हुई है और इसीलिए काशी के सभी 84 घाटों का पौराणिक महत्व भी है। लेकिन, वाराणसी के गंगा नदी में लापरवाही से डूबने की वजह से लोगों की होने वाली मौत की घटनाएं विचलित करने वाली होती है और सबसे हैरानी वाली बात यह है कि अनेक प्रयास के बावजूद भी यह घटनाएं नहीं रुक रही हैं।
वाराणसी के गंगा तटवर्ती क्षेत्र के 84 घाट में कई प्रमुख घाट हैं जहां पर लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं. लेकिन, कई बार इन घाटों पर लोगों की लापरवाही की वजह से डूबने की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें उनकी मौत तक हो जाती है. यह हादसा उनके परिवार के लिए किसी सदमे से कम नहीं रहता।
इन घाटों पर सबसे ज्यादा होते हैं हादसे
वाराणसी के अस्सी घाट, तुलसी घाट, शिवाला घाट, मुंशी घाट, अहिल्याबाई घाट, पांडे घाट, सिंधिया घाट, रविदास घाट, चौसट्टी घाट सहित अन्य घाटों पर नहाने के दौरान थोड़ी सी चूक की वजह से डूबने की घटनाएं अक्सर सुनने को मिलती है।
अभी कुछ ही दिन पहले गाजीपुर के रहने वाले होनहार छात्र तुषार राय की तुलसी घाट पर डूबने से मौत हो गई.सबसे प्रमुख बात की गर्मी के दिनों में इन घटनाओं में अधिक बढ़ोतरी देखी जाती है. हाल के दिनों में स्थानीय लोगों की तरफ से भी प्रशासन से अपील करके ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निर्णय लेने की अपील की गई थी।
स्थानीय लोगों की माने तो घाट से सटे सीढ़ियों के नीचे गंगा नदी की गहराई कहीं-कहीं बहुत ज्यादा है. जहां अनुमान लगा पाना आसान नहीं है और स्नान करने पहुंचने वाले लोगों को इसका अंदाजा नहीं लग पाता है. इसलिए गंगा घाट के बिल्कुल किनारे ही जरा सी चूक लोगों के जीवन पर ही भारी पड़ जाती है और देखते ही देखते वह गहरे पानी में चले जाते हैं।
तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं रुक रहे हादसे
वाराणसी जल पुलिस, पुलिस कमिश्नरेट और नगर निगम द्वारा इन प्रमुख घाटों पर बैरिकेडिंग किया गया है. इसके अलावा अनाउंसमेंट और सांकेतिक बोर्ड के माध्यम से भी लोगों को गंगा नदी में सावधानी से स्नान करने की अपील की जाती है लेकिन, इसके बावजूद घाटों के समीप गंगा नदी में होने वाली घटनाएं विचलित करती हैं।