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TVK प्रमुख विजय ने ड्राइवर के बेटे को दिया था टिकट, DMK विधायक को चटाई धूल; हासिल की बड़ी जीत...

TVK प्रमुख विजय ने ड्राइवर के बेटे को दिया था टिकट, DMK विधायक को चटाई धूल; हासिल की बड़ी जीत...

एजेंसी डेस्क :: तमिलनाडु के विरुगंबक्कम विधानसभा क्षेत्र से तमिलगा वेट्ट्री कज़गम (TVK) प्रमुख जोसेफ विजय के निजी ड्राइवर राजेंद्रन के बेटे आर सबरीनाथन ने जीत हासिल की है। टीवीके प्रत्याशी सबरीनाथन ने डीएमके के मौजूदा विधायक एएमवी प्रभाकर राजा को 27086 वोटों के बड़े अंतर से हराया।जीत दर्ज करने के बाद आर सबरीनाथन ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं। डीएमके का अंत हो गया है।" इस जीत से राज्य के चुनावी परिदृश्य में टीवीके की बढ़ती उपस्थिति और मजबूत हुई है।

दो सीटों पर जीते विजय

वहीं दूसरी तरफ टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय ने भी तमिलनाडु की पेरम्बूर विधानसभा सीट से भारी जीत हासिल की है। विजय को 120365 वोट मिले, जबकि डीएमके प्रत्याशी आरडी शेखर को 66650 वोट मिले। विजय ने पेरम्बूर सीट पर 53,715 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। अभिनेता से राजनेता बने विजय, तिरुचिरापल्ली (पूर्वी) विधानसभा सीट पर भी जीत हासिल कर ली है। यहां उन्होंने डीएमके के नेता एस इरूदयराज को 27416 वोटों के अंतर से हराया। विजय को 91381 वोट मिले, जबकि डीएमके प्रत्याशी को 63965 वोट मिले।

टीवीके को मिला बहुमत

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे भी सामने आ गए हैं। तमिलनाडु में जोसेफ विजय की टीवीके 206 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। टीवीके का यह पहला विधानसभा चुनाव था। वहीं दूसरी तरफ डीएमके को 59 जबकि AIADMK को इस चुनाव में 47 सीटों पर ही जीत मिल सकी। राज्य में कांग्रेस को भी पांच सीटों पर जीत मिली है। इस चुनाव में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को भी अपनी सीट पर हार का सामना करना पड़ा। उनकी कोलाथुर सीट पर टीवीके के वीएस बाबू ने 8,795 वोटों से जीत दर्ज की।

दिग्गजों की श्रेणी में शामिल हुए विजय

दरअसल, इन नतीजों के बाद जोसेफ विजय अब एनटी रामाराव, एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता जैसे दिग्गज अभिनेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। उनका प्रदर्शन इस बात को पुष्ट करता है कि उनकी फिल्मी लोकप्रियता जनता के साथ एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव में तब्दील हो गई है, जो जनता के जनादेश में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। टीवीके की जीत एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है, क्योंकि तमिलनाडु जून 1977 के बाद पहली बार द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (AIADMK) के प्रभुत्व से मुक्त सरकार देख सकता है।